
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के बीच हुई धक्का-मुक्की, मौके पर तैनात रहा भारी पुलिस बल (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
68500 Teacher Recruitment Protest : राजधानी लखनऊ में शनिवार को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास की ओर पहुंचे और वहां घेराव करते हुए करीब आधे घंटे तक नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय गरमा गया, जब पुलिस ने अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले लंबे समय से लंबित हैं और चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति का इंतजार करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने शनिवार को राजधानी में प्रदर्शन का रास्ता अपनाया।
शनिवार को बड़ी संख्या में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी राजधानी में जुटे। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। प्रदर्शनकारी सरकार से लंबित भर्ती प्रक्रिया में नियुक्ति देने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को तत्काल पूरा करने की आवाज उठाई। करीब आधे घंटे तक मौके पर प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर चलता रहा। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं और अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।
प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की और निर्धारित व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। हालांकि अभ्यर्थी अपनी मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन के दौरान किसी बड़े विवाद की स्थिति न बने, इसके लिए पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखती रही।
अभ्यर्थियों का मुख्य मुद्दा लंबित 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में नियुक्ति से जुड़ा है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों का भविष्य लंबे समय से अधर में है। कई बार अधिकारियों और सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के बावजूद उन्हें अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं मिला है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती से जुड़े लंबित मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके लिए यह केवल नौकरी का मामला नहीं बल्कि उनके भविष्य और वर्षों की मेहनत से जुड़ा सवाल है।
शनिवार को लखनऊ में एक ओर 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर लखनऊ विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय में आयोजित पुस्तक मेले का उद्घाटन करने पहुंचे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले समाजवादी छात्र सभा और एनएसयूआई से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया। विपक्षी छात्र संगठनों की ओर से संभावित विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई की।
लखनऊ विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस पहले से सतर्क नजर आई। विश्वविद्यालय परिसर में मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई। इसी क्रम में विपक्षी छात्र संगठनों के पदाधिकारियों और सदस्यों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई।
पुलिस की इस कार्रवाई को संभावित विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि छात्र संगठनों की ओर से इसे लेकर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर भी सबकी नजर बनी हुई है। राजधानी में एक ही दिन दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिली।
लखनऊ विश्वविद्यालय में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम को लेकर तैयारियां की गई थीं। मुख्यमंत्री यहां पुस्तक मेले का उद्घाटन करने वाले थे। कार्यक्रम को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के साथ-साथ व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया गया। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान किसी तरह का विरोध या व्यवधान न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ाई गई। छात्र संगठनों के संभावित विरोध को देखते हुए पहले ही कार्रवाई किए जाने से विश्वविद्यालय का माहौल भी चर्चा में रहा।
लखनऊ में शनिवार को 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का प्रदर्शन और लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों के पदाधिकारियों की हिरासत ने राजधानी की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। एक तरफ शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी नियुक्ति की मांग को लेकर सड़क पर उतरे, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के विश्वविद्यालय कार्यक्रम से पहले विपक्षी छात्र संगठनों पर पुलिस की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी।
शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को उनकी मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और लंबे समय से लंबित प्रक्रिया का समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि लगातार इंतजार के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के सामने आर्थिक और मानसिक परेशानियां खड़ी हो रही हैं।
प्रदर्शन के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और उनकी मांग पर होने वाले फैसले पर है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियुक्ति हासिल करना है और वे इसके लिए लगातार अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
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Updated on:
12 Sept 2026 12:07 pm
Published on:
12 Sept 2026 12:01 pm
