त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की जीत को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति की जीत मानी जा रही है।
लखनऊ. त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की जीत को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति की जीत मानी जा रही है । माना जा रहा है कि पार्टी ने यूपी के सीएम को त्रिपुरा में ट्रम्प कार्ड के रूप में पेश किया और यह रणनीति सफल रही । दरअसल त्रिपुरा में बड़ी संख्या में नाथ सम्प्रदाय के मतदाता रहते हैं और उन्हें ध्रुवीकृत करने के लिए योगी आदित्यनाथ को आगे किया गया था । जानकार मानते हैं कि पार्टी का यह दांव सफल रहा और बड़ी संख्या में मतदाताओं ने अपना रुझान भाजपा की ओर व्यक्त किया ।
योगी ने जीत को बताया ऐतिहासिक
त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी को मिली जीत को खुद योगी आदित्यनाथ ने भी ऐतिहासिक बताया है । उन्होंने कहा है कि भारत की राजनीति में आज का दिन बेहद ख़ास है । त्रिपुरा में 25 वर्ष से कायम लेफ्ट फ्रंट की सरकार को जनता ने बाहर कर भाजपा पर भरोसा जताया है। योगी ने कहा कि भाजपा ने अब पूर्वोत्तर राज्यों में भी अपना जनाधार बनाया है। उन्होंने नागालैंड और मेघालय में भी भाजपा के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताया है।
योगी बनाये गए थे स्टार प्रचारक
त्रिपुरा में चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह , केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी , केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के साथ ही योगी आदित्यनाथ को भी स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया गया था। त्रिपुरा में लगभग 35 प्रतिशत वोटर बंगाली नाथ संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ भी नाथ सम्प्रदाय से ताल्लुक रखते हैं और उन्हें नाथ सम्प्रदाय के वोटरों को ध्रुवीकृत करने के मकसद से वामपंथियों के गढ़ में उतारा गया था। चुनाव नतीजे बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ पर किया गया यह भरोसा काफी हद तक सही साबित हुआ और नतीजों ने पूर्वोत्तर में एक नया इतिहास लिखने में सफलता हासिल की।