लखनऊ

TechSangam Cyber ​​Crime: दो साइबर थानों से 75 जिलों तक पहुंचा नेटवर्क! टेक्नोलॉजी से न्याय मजबूत करने पर सीएम योगी का जोर

Tech Sangam 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेकसंगम 2026 के जरिए साइबर सुरक्षा, एआई और फॉरेंसिक विज्ञान को बढ़ावा देने पर जोर दिया। लक्ष्य बेहतर न्याय व्यवस्था और युवाओं के लिए नए अवसर हैं।
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Updated: 24 Oct 2026, 11:25 AM IST
‘टेकसंगम 2026’ को लेकर मुख्यमंत्री का संदेश (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
‘टेकसंगम 2026’ को लेकर मुख्यमंत्री का संदेश (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UPSIFS Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि तकनीक की नई संभावनाओं को जनहित, न्याय और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रशिक्षित मानव संसाधन को बढ़ावा देकर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के माध्यम से ‘टेकसंगम 2026’ की विशेषताओं और उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद साइबर सुरक्षा तथा फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, तकनीक का उद्देश्य केवल आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि उसका उपयोग नागरिकों की सुरक्षा, अपराधों की वैज्ञानिक जांच और युवाओं के लिए शिक्षा एवं रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में भी होना चाहिए। उन्होंने ‘टेकसंगम 2026’ को इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।

एआई, साइबर फॉरेंसिक और क्वांटम तकनीक पर होगा मंथन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में आयोजित ‘टेकसंगम 2026’ में प्रतिभाग करेंगे। इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर फॉरेंसिक, क्वांटम तकनीक और डेटा प्रोटेक्शन जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन तकनीकों का प्रभाव आज प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल सेवाओं और न्यायिक प्रक्रिया पर तेजी से बढ़ रहा है।

 ऐसे में तकनीकी नवाचार को नागरिक सुरक्षा, प्रभावी न्याय व्यवस्था और डिजिटल भरोसे से जोड़ना आवश्यक है। साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति के बीच डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रह, उनका वैज्ञानिक विश्लेषण और उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, ‘टेकसंगम 2026’ विशेषज्ञों को इन चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान करेगा।

2017 से पहले सीमित थे साइबर थाने और फॉरेंसिक लैब

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो साइबर थाने और चार फॉरेंसिक लैब थीं। उनके अनुसार, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी संसाधनों की सीमित उपलब्धता अपराधों की जांच में चुनौती पैदा करती थी। वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में कई बार अपराधियों के खिलाफ प्रभावी अभियोजन में कठिनाइयां आती थीं।

साइबर सुरक्षा, एआई और फॉरेंसिक विज्ञान में आधुनिक तकनीक व वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर  (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )  

मुख्यमंत्री ने उस समय कन्विक्शन रेट यानी दोषसिद्धि दर 30 प्रतिशत से कम होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अपराधों की जांच में वैज्ञानिक तकनीकों का पर्याप्त उपयोग नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया को अपेक्षित मजबूती नहीं मिल पा रही थी। फॉरेंसिक विज्ञान अपराध से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य, डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी और वैज्ञानिक परीक्षण जांच को अधिक तथ्यपरक बनाने में सहायता करते हैं। साइबर अपराधों के मामलों में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अपराध से जुड़े साक्ष्य मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ऑनलाइन खातों और डिजिटल नेटवर्क में मौजूद हो सकते हैं।

75 जिलों में साइबर थानों का नेटवर्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश सरकार ने साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक जांच की क्षमता बढ़ाने की दिशा में कार्य किया है। उनके मुताबिक, अब उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर थाने स्थापित हैं। इसके साथ ही प्रत्येक मंडल में फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

साइबर थानों का विस्तार डिजिटल अपराधों की शिकायतों और उनकी जांच के लिए महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन ठगी, पहचान की चोरी, डिजिटल भुगतान से जुड़े अपराध और अन्य साइबर गतिविधियों की जांच में प्रशिक्षित कर्मियों तथा तकनीकी संसाधनों की जरूरत होती है। जिला स्तर पर साइबर पुलिस की उपलब्धता से ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था को विस्तार मिल सकता है। फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ने से वैज्ञानिक साक्ष्यों के परीक्षण और जांच में सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन प्रयासों का वास्तविक प्रभाव प्रयोगशालाओं की उपलब्धता, उपकरणों, विशेषज्ञों की संख्या और जांच की समयबद्धता जैसे पहलुओं पर भी निर्भर करता है।

दोषसिद्धि दर बढ़ाने में वैज्ञानिक जांच की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी संसाधनों और वैज्ञानिक जांच क्षमता के विस्तार से साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने तथा अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। उन्होंने प्रदेश में दोषसिद्धि दर में वृद्धि का भी उल्लेख किया।

वैज्ञानिक साक्ष्य आपराधिक मामलों में घटनाओं की कड़ियां जोड़ने, आरोपों की जांच करने और अदालत के सामने तथ्यों को स्पष्ट करने में उपयोगी हो सकते हैं। डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता बनाए रखना, उनकी सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करना और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना इस पूरी व्यवस्था के अहम हिस्से हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान का विकास केवल पुलिस की जांच क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध न्याय व्यवस्था में साक्ष्य आधारित कार्रवाई को मजबूत करने से भी है।

युवाओं के लिए शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री ने फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर सुरक्षा को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि इन उभरते क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार की नई संभावनाएं बन रही हैं। तकनीकी विशेषज्ञता की बढ़ती जरूरत के कारण साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

UPSIFS जैसे संस्थानों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रियाओं से परिचित कराने का अवसर मिलता है। शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध और उद्योग जगत से जुड़ाव युवाओं को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के संदेश का प्रमुख उद्देश्य तकनीकी विकास को रोजगार और सामाजिक हित से जोड़ना है, ताकि प्रदेश के युवा उभरते क्षेत्रों में अपनी क्षमता विकसित कर सकें और देश की तकनीकी प्रगति में योगदान दे सकें।

वैज्ञानिकों, उद्योग और नीति-निर्माताओं को जोड़ने का मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘टेकसंगम 2026’ देश-विदेश के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का अवसर है। ऐसे आयोजन साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उभरती तकनीकों के उत्तरदायी उपयोग पर सार्थक चर्चा को बढ़ावा दे सकते हैं। अनुसंधान संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग से नई तकनीकों के विकास तथा उनके व्यावहारिक उपयोग को गति मिल सकती है। साथ ही, डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित बनाने और तकनीकी चुनौतियों का समाधान खोजने में भी सहायता मिल सकती है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रयास भारत को उभरती तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने और नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने तकनीकी नवाचार को आत्मनिर्भर भारत की क्षमता और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि जनहित, न्याय और युवाओं के भविष्य को केंद्र में रखकर ही तकनीकी विकास को सार्थक बनाया जा सकता है। ‘टेकसंगम 2026’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को लेकर संवाद को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। इसका व्यापक उद्देश्य तकनीक को नागरिकों की सुरक्षा, प्रभावी न्याय व्यवस्था और युवाओं के लिए नए अवसरों का आधार बनाना है।

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24 Oct 2026, 11:25 AM IST
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