Yogi Cabinet Expansion Today: योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार आज होगा। भाजपा जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए छह नए चेहरों को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार आज होने जा रहा है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के दूसरे कार्यकाल का यह दूसरा विस्तार आज दोपहर तीन बजे लखनऊ स्थित जन भवन में आयोजित होगा। राजनीतिक गलियारों में इस विस्तार को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए भाजपा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की बड़ी रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना लगभग तय माना जा रहा है। इनमें पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Singh Chaudhary, सपा से बगावत करने वाले विधायक Manoj Kumar Pandey, वाराणसी से विधान परिषद सदस्य Hansraj Vishwakarma, फतेहपुर की खागा सीट से विधायक Krishna Paswan, अलीगढ़ के खैर से विधायक Surendra Diler और कैलाश सिंह राजपूत के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित एक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद देर शाम लखनऊ लौटे। इसके तुरंत बाद उन्होंने राज्यपाल Anandiben Patel से जन भवन में मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दे दिया गया। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पिछले कई दिनों से दिल्ली और लखनऊ के बीच लगातार बैठकों और मंथन का दौर चल रहा था। भाजपा नेतृत्व सामाजिक समीकरणों, संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी कर रहा था।
उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत फिलहाल कुल 54 मंत्री हैं। संविधान के अनुसार राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में छह नए मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश मौजूद है।
वर्तमान मंत्रिमंडल में 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री शामिल हैं। यदि किसी मौजूदा मंत्री को हटाया नहीं जाता है तो छह नए चेहरों की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम इस विस्तार में सबसे चर्चित माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत पकड़ रखने वाले भूपेंद्र चौधरी को संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने वाला नेता माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी एंट्री भाजपा को जाट और पश्चिमी यूपी के वोट बैंक को मजबूत करने में मदद कर सकती है। लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिमी यूपी में भाजपा को मिले मिले-जुले संकेतों के बाद पार्टी इस क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज कुमार पांडेय का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा के साथ खड़े होने के बाद से ही उनके लिए मंत्री पद की चर्चा चल रही थी।
राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा लाइन से अलग जाकर मतदान करने वाले नेताओं में मनोज पांडेय सबसे प्रमुख चेहरा रहे थे। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की “राजनीतिक मैसेजिंग” के रूप में देखा जा रहा है कि पार्टी अपने साथ आने वालों को सम्मान और अवसर देती है।
भाजपा इस विस्तार में जातीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश करती दिखाई दे रही है। वाराणसी से आने वाले हंसराज विश्वकर्मा अति पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं कृष्णा पासवान अनुसूचित जाति वर्ग से आती हैं।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा यूपी में ओबीसी और दलित वोट बैंक को और मजबूत करने के लिए यह रणनीति अपना रही है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसी भी सामाजिक वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती। सुरेंद्र दिलेर का नाम भी दलित और पश्चिमी यूपी के समीकरणों को साधने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा राज्य मंत्रियों को कैबिनेट रैंक भी दिया जा सकता है। सहकारिता मंत्री JPS Rathore, माध्यमिक शिक्षा मंत्री Gulab Devi, उद्यान मंत्री Dinesh Pratap Singh और समाज कल्याण मंत्री Aseem Arun को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी तेज है। यदि ऐसा होता है तो भाजपा सरकार में नए शक्ति संतुलन देखने को मिल सकते हैं।
योगी सरकार 2.0 का पहला मंत्रिमंडल विस्तार पांच मार्च 2024 को हुआ था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए उस विस्तार में भाजपा ने पिछड़े, दलित और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए चार नए कैबिनेट मंत्री बनाए थे। उस समय Om Prakash Rajbhar, Dara Singh Chauhan, रालोद विधायक अनिल कुमार और भाजपा विधायक सुनील कुमार शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। हालांकि बाद में Jitin Prasada के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद यूपी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या घट गई थी।
योगी सरकार बनने के समय पिछड़ा वर्ग के 20, दलित वर्ग के 8, ब्राह्मण समाज के 7, राजपूत समाज के 6, वैश्य समाज के 4 और भूमिहार समाज के 2 मंत्री बनाए गए थे। पहले विस्तार के बाद पिछड़े वर्ग के मंत्रियों की संख्या बढ़कर 22 हो गई थी, जबकि दलित प्रतिनिधित्व भी बढ़ा था। भाजपा अब दूसरे विस्तार में इन समीकरणों को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में भाजपा के पास यूपी विधानसभा में 258 विधायक हैं। इनमें ओबीसी वर्ग के 84, एससी वर्ग के 59, राजपूत 45 और ब्राह्मण 42 विधायक शामिल हैं। इसी सामाजिक आधार को ध्यान में रखते हुए पार्टी मंत्री चयन कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का बड़ा संकेत है। भाजपा लोकसभा चुनाव के बाद मिले राजनीतिक संदेशों का विश्लेषण कर अब नए सामाजिक समीकरण तैयार करने में जुटी है। पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और दलित-पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर पार्टी विशेष रणनीति पर काम कर रही है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर ऐसा संतुलन बने जिससे हर क्षेत्र और वर्ग को प्रतिनिधित्व का संदेश दिया जा सके।
आज दोपहर तीन बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं जारी हैं कि अंतिम समय में सूची में कोई बदलाव होता है या नहीं। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने अभी तक आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन जिन छह नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है, उन्हें लगभग तय माना जा रहा है। योगी सरकार 2.0 का यह दूसरा विस्तार आने वाले चुनावी समीकरणों और भाजपा की भविष्य की रणनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।