
Mahasamund News: महासमुंद शहर की सबसे बड़ी यातायात समस्या का समाधान बनने वाला बायपास 11 साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर सका है। सर्वे और अलाइनमेंट की धीमी प्रक्रिया के कारण परियोजना अब भी शुरुआती चरण में अटकी हुई है। उधर, राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर लगातार बढ़ता ट्रैफिक, भारी वाहनों का दबाव और रोज लगने वाला जाम शहरवासियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
वर्ष 2015 में उठी महासमुंद बायपास की मांग आज भी अधूरी है।
पहले कराया गया सर्वे वर्ष 2023 में निरस्त कर दिया गया, जिसके बाद भोपाल की एजेंसी को नए सिरे से जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब दो वर्ष बीतने के बावजूद अंतिम अलाइनमेंट तैयार नहीं हो सका है। इस बार प्रस्तावित बायपास का रूट पहले की योजना से अलग रखा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अलाइनमेंट तैयार होने के बाद भूमि अधिग्रहण, स्वीकृतियां और निर्माण संबंधी अन्य प्रक्रियाएं शुरू होंगी।
chhattisgarh News: इधर, बरोंडाचौक से जिला अस्पताल तक राष्ट्रीय राजमार्ग-53 पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के एसडीओ जेपी कौशल ने बताया कि हाल ही में परियोजना की ऑनलाइन समीक्षा बैठक हुई है। वर्तमान में अलाइनमेंट तैयार करने का काम अंतिम चरण में है, जिसे लगभग एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बरोंडाचौक से रायपुर रोड स्थित दोपहिया शोरूम तक राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर अपनी वास्तविक चौड़ाई खो चुका है। सडक़ किनारे लगी अस्थायी दुकानें, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण वाहन चालकों को पर्याप्त जगह नहीं मिलती। फुटपाथ घिर जाने से पैदल राहगीरों को मजबूरन मुख्य सडक़ पर चलना पड़ता है। कई जगह भारी वाहन घंटों तक सडक़ किनारे खड़े रहते हैं, जबकि कुछ चालक गलत दिशा से प्रवेश कर यातायात व्यवस्था बिगाड़ देते हैं। इससे रोजाना विवाद की स्थिति बनती है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। नियमित कार्रवाई और सख्त निगरानी के बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। क्योंकि, रोजाना इसी मार्ग से हजारों से आना-जाना करते हैं।
महासमुंद बायपास को लेकर वर्षों से मांग उठ रही है। वर्ष 2023 में केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री को भी पत्र भेजकर परियोजना में तेजी लाने की मांग की गई थी। इसके बावजूद प्रक्रिया अब तक गति नहीं पकड़ सकी है। वर्तमान में ओडिशा और खरियार रोड की ओर से आने-जाने वाले अधिकांश भारी वाहन शहर के भीतर से गुजरते हैं, जिससे पूरे दिन यातायात प्रभावित रहता है।
मंगलवार बरोंडाचौक पर बड़ा हादसा टल गया। स्कूल जा रही एक छात्रा की साइकिल ट्रक के नीचे फंस गई, लेकिन चालक ने समय रहते ब्रेक लगा दिए, जिससे उसकी जान बच गई। छात्रा को मामूली चोटें आईं, जबकि साइकिल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि ट्रक कुछ फीट और आगे बढ़ जाता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। शहर में इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। पहले भी कई लोग भारी वाहनों की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया। जब तक बायपास नहीं बनेगा, तब तक ऐसे खतरे बने रहेंगे।
बेलसोंडा रेलवे क्रॉसिंग से घोड़ारी तक सुबह से देर शाम तक भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। इसी मार्ग पर सडक़ चौड़ीकरण का काम चलने से कई हिस्सों में रास्ता संकरा हो गया है। नतीजा यह है कि छोटी-सी बाधा भी पूरे इलाके में लंबा जाम लगा देती है। स्कूली बच्चे, कर्मचारी, मरीज और ग्रामीण घंटों तक फंसे रहते हैं। कई बार वाहन चालकों को विपरीत दिशा से निकलने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। बेलसोंडा क्षेत्र में पहले भी कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। यहां डिवाइडर निर्माण और ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। बायपास बनने के बाद शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों का दबाव काफी कम होगा और जाम की समस्या से राहत मिलेगी।