महासमुंद

Ganja Smuggling News: कौन जुटाता था गांजा, कौन पहुंचाता था खेप? नेटवर्क खंगाल रही महासमुंद पुलिस

Mahasamund Ganja Smuggling: महासमुंद पुलिस ने इस साल अब तक 50 करोड़ रुपए का गांजा जब्त किया है। अब पुलिस ओडिशा से दूसरे राज्यों तक फैले तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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Odisha Ganja Smuggling
गांजे का खेल 50 करोड़ का (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Ganja Seizure: इस साल अभी तक 50 करोड़ का गांजा जब्त होने के बाद अब महासमुंद पुलिस की नजर उस पूरे नेटवर्क पर है, जो ओडिशा से गांजे की खेप जुटाकर देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाता था। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के लिए सामने आए खेपों के आंकड़े इस कारोबार के अंतरराज्यीय फैलाव को उजागर कर दिए हैं। कार्रवाई में गिरफ्तारियों के बावजूद 70 आरोपियों का फरार होना बताता है कि तस्करी की पूरी श्रृंखला तक पहुंचना अभी बाकी है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेप के स्रोत से लेकर उसे हासिल करने वालों तक की कड़ियां जोड़ने की है।

ओडिशा से गांजा लाकर दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए तस्कर परिवहन के अलग-अलग तरीके अपना रहे थे। कहीं बस और ट्रेन का इस्तेमाल हुआ, तो कहीं फल-सब्जियों की गाड़ियों, कंटेनरों और एंबुलेंस तक के जरिए खेप ले जाने की कोशिश की गई। महासमुंद पुलिस की कार्रवाई का अगला पहलू तस्करी की पूरी श्रृंखला की पहचान करना है।

पुलिस बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि गांजे की व्यवस्था कौन करता था, परिवहन की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी और खेप आगे किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी। इस जांच में परिवहनकर्ताओं के साथ आपूर्ति और वितरण से जुड़े लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि अलग-अलग राज्यों में फैली इन कडिय़ों को जोडक़र तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश कर तस्करी पर अंकुश लगाई जाए।

पुलिस से बचने के लिए बदलते थे तरीके

तस्करी के मामलों में गांजा ले जाने के लिए बस, ट्रेन, ट्रक, पिकअप, बाइक और कोरियर सेवा के वाहनों का इस्तेमाल सामने आया है। इसके अलावा फलों और सब्जियों की ढुलाई करने वाले वाहनों, कंटेनरों के विशेष चैंबर तथा पैकर्स एंड मूवर्स के सामान में गांजा छिपाकर ले जाने की घटना भी सामने आ चुकी है। ऐसे तरीकों के कारण वाहन जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी पुलिस की कार्रवाई का अहम हिस्सा बनी हुई है। इस साल गांजा जब्ती के प्रकरणों में करीब 10 करोड़ रुपए कीमत के वाहन जब्त किए गए हैं।

तीन थाना क्षेत्रों में करीब नौ टन गांजा जब्त

थानावार आंकड़ों के मुताबिक, सिंघोड़ा में 3,325 किलो, कोमाखान में 2,970 किलो और बसना में 2,683 किलो गांजा जब्त किया गया। इन तीनों थाना क्षेत्रों में कुल 8,978 किलो गांजे की जब्ती दर्ज है। इसके अलावा 1,432 किलो डोडा जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। संभावित तस्करी मार्गों पर निगरानी, वाहन जांच और पूरे नेटवर्क की पड़ताल जारी रहेगी। अब जांच का महत्वपूर्ण पड़ाव फरार आरोपियों तक पहुंचने और खेपों की आपूर्ति से लेकर वितरण तक जुड़े लोगों की भूमिका स्पष्ट करने का है।

पहरा, फिर भी तस्करी

सीमावर्ती इलाकों में पुलिस का पहरा और निगरानी के बावजूद गांजा तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रही है। तस्कर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए लगातार नशे की खेप एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा रहे हैं। अलग-अलग रास्तों और वाहनों का इस्तेमाल कर तस्करी का यह नेटवर्क काफी सक्रिय है।

भूमिका की भी पड़ताल

पुलिस के मुताबिक जब्त गांजे की खेपों में 4,511 किलो महाराष्ट्र, 2,263 किलो उत्तर प्रदेश और 1,223 किलो मध्यप्रदेश भेजे जाने से संबंधित जानकारी सामने आई है। राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के लिए भी खेपों का उल्लेख है। ओडिशा में कालाहांडी, कंधमाल, बौद्ध, रायगढ़ा और अन्य जिलों से संबंधित खेपों की जानकारी भी जांच में उजागर हुई है। पुलिस इन स्रोतों और गंतव्यों के बीच संपर्क स्थापित करने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

Updated on:
21 Oct 2026 11:54 am
Published on:
21 Oct 2026 11:54 am