
NH 53 Road Accident: एनएच-53 पर 127 हादसे… 79 मौतें। एनएच-353 पर 56 दुर्घटनाएं… 32 जानें गईं। ये आंकड़े महासमुंद जिले के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर की भयावह तस्वीर सामने रखते हैं। फोरलेन सड़क, रफ्तार की निगरानी और ब्लैक स्पॉट चिह्नित होने के बाद भी दुर्घटनाओं का सिलसिला नहीं थमा। घोड़ारी से सरायपाली के बीच तेज गति, गलत साइड, बिना हेलमेट वाहन चलाने और यातायात नियमों की अनदेखी का खामियाजा लोग अपनी जान देकर भुगत रहे हैं। सवाल अब सड़क की चौड़ाई का नहीं, उस पर सुरक्षित सफर करने का है।
यातायात शाखा के आंकड़ों के अनुसार, महासमुंद जिले में एनएच-53 पर 127 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 79 लोगों की मौत हुई और 79 लोग घायल हुए। एनएच-353 पर भी हादसों का सिलसिला जारी है। इस मार्ग पर 56 दुर्घटनाओं में 32 लोगों की जान गई, जबकि 35 लोग घायल हुए हैं। एनएच-53 की स्थिति इस लिहाज से ज्यादा गंभीर है। फोरलेन होने के कारण यहां वाहनों की आवाजाही अपेक्षाकृत सुगम है और सड़क की चौड़ाई भी पर्याप्त है। लेकिन यही बेहतर सड़क कई बार वाहनों की रफ्तार बढ़ाने का कारण बन रही है। रफ्तार पर नजर रखने के लिए उपकरण लगाए जाने के बाद भी दुर्घटनाओं पर निर्णायक अंकुश नहीं लग सका है।
दूसरी तरफ, एनएच-353 के कई हिस्सों में सड़क की हालत खराब है। जगह-जगह गड्ढे और टूटे हिस्से होने के बावजूद इस मार्ग पर एनएच-53 की तुलना में दुर्घटनाओं और मौतों का आंकड़ा कम है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई वाहन चालक यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं। गलत साइड से वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना और जल्द पहुंचने के लिए शॉर्टकट अपनाना कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। सड़क किनारे बिना संकेत के खड़े वाहन भी तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए खतरा बन रहे हैं। ऐसे मामलों में पीछे से टक्कर होने पर हादसे की गंभीरता और बढ़ जाती है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा साधनों में से एक है, लेकिन इसका नियमित इस्तेमाल अब भी चुनौती बना हुआ है। जिला मुख्यालय समेत प्रमुख मार्गों पर पुलिस की कार्रवाई के बावजूद दुर्घटनाओं के आंकड़े बताते हैं कि केवल चालानी कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा। लोग अब चालान की जगह हेलमेट प्रदान करने की भी मांग करने लगे हैं। यातायात शाखा के डीएसपी गोपाल धुर्वे ने कहा कि वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। सड़क सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में मौतों को देखते हुए यातायात पुलिस हेलमेट को लेकर लगातार कार्रवाई कर रही है। जिला मुख्यालय के अलावा प्रमुख सड़कों पर बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के खिलाफ चालान काटे जा रहे हैं। लोगों को इसके इस्तेमाल के लिए समझाइश भी दी जा रही है। कई वाहन चालक हेलमेट का उपयोग करने लगे हैं, लेकिन इसका प्रभाव अभी सड़क दुर्घटनाओं के समग्र आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। जानकारों के मुताबिक, नियमों का पालन केवल कार्रवाई के डर से नहीं, बल्कि अपनी और दूसरे राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी समझकर होना जरूरी है।
जनवरी से सितंबर तक सामने आए आंकड़े सड़क सुरक्षा की चुनौती की गंभीरता बताते हैं। इस अवधि में 388 दुर्घटनाओं में 223 लोगों की जान जा चुकी है। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में 30, फरवरी में 31, मार्च में 25, अप्रैल में 15, मई में 31, जून में 29, जुलाई में 18, अगस्त में 16 और सितंबर में 28 लोगों की मौत हुई।
यानी नौ महीनों में किसी भी महीने सड़क हादसों से होने वाली मौतों का आंकड़ा शून्य के करीब भी नहीं पहुंचा। सबसे अधिक मौतें फरवरी और मई में 31-31 दर्ज हुईं। जनवरी में 30 और जून में 29 लोगों ने जान गंवाई। सितंबर में भी 28 मौतें हुईं।
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पिछले दिनों विशेषज्ञ टीमों ने राष्ट्रीय राजमार्गों और चिन्हित ब्लैक स्पॉट का निरीक्षण किया था। टीम ने दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा सुविधाएं बढ़ाने, जरूरी सुधार करने और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे होने वाली अवैध पार्किंग पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। महासमुंद जिले में एनएच-53 पर चार ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें करणीकृपा पावर प्लांट, कोडार चौक से काष्ठागार, बावनकेरा चौक और न्यू गिल ढाबा साल्हेतराई शामिल हैं।
इन स्थानों पर दुर्घटना की आशंका को देखते हुए सुधारात्मक उपायों की जरूरत बताई गई है। वहीं, एनएच-353 पर कांग्रेस चौक महासमुंद को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां सुधार कार्य नहीं होने की जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों के निर्देशों के बाद इन स्थानों पर किए जाने वाले स्थायी उपाय सड़क सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण होंगे।