
Smart Meter: महासमुंद में बिजली व्यवस्था को हाईटेक बनाने का सपना दिखाकर शुरू की गई स्मार्ट मीटर परियोजना महासमुंद जिले में अब तक अधूरी है। डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी करीब 26 हजार घरों तक स्मार्ट मीटर नहीं पहुंच पाए हैं। इसके चलते न केवल प्री-पेड बिजली व्यवस्था शुरू होने में देरी हो रही है, बल्कि पीएम सूर्य घर योजना के हजारों संभावित हितग्राही भी इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर स्मार्ट मीटर लगवा चुके उपभोक्ताओं के बीच बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। ऐसे में विभाग और ठेका एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जिले में दो लाख 18 हजार 492 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक केवल एक लाख 92 हजार 242 मीटर ही लगाए जा सके हैं। यानी करीब 26 हजार उपभोक्ता अब भी स्मार्ट मीटर का इंतजार कर रहे हैं। इससे न केवल प्री-पेड बिजली व्यवस्था शुरू होने में देरी हो रही है, बल्कि केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महासमुंद जोन, जिसमें गरियाबंद जिला भी शामिल है, में कुल तीन लाख 13 हजार 565 स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके मुकाबले दो लाख 70 हजार 163 मीटर ही लगाए जा सके हैं। यानी लगभग एक चौथाई कार्य अब भी अधूरा है। जिले के विकासखंडों की स्थिति पर नजर डालें तो महासमुंद क्षेत्र में लक्ष्य के मुकाबले लगभग चार हजार स्मार्ट मीटर लगना बाकी है। पिथौरा में करीब पांच हजार और सरायपाली में 16 हजार से अधिक मीटरों का इंस्टॉलेशन शेष है। सबसे धीमी प्रगति सरायपाली क्षेत्र में देखने को मिल रही है, जहां लक्ष्य के मुकाबले बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब भी इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं।
स्मार्ट मीटर नहीं लग पाने का असर अब अन्य योजनाओं पर भी दिखाई देने लगा है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगाने के इच्छुक कई उपभोक्ताओं को पहले स्मार्ट मीटर लगवाने की सलाह दी जा रही है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता वायके मनहर का कहना है कि स्मार्ट मीटर का शत-प्रतिशत इंस्टॉलेशन होने के बाद ही प्री-पेड बिजली व्यवस्था लागू की जाएगी। वर्तमान में 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। संबंधित एजेंसियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
स्मार्ट मीटर परियोजना की धीमी प्रगति ने विभागीय मॉनीटरिंग और ठेका कंपनियों की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध भी हुआ, लेकिन जनजागरुकता और संवाद की कमी के कारण स्थिति और जटिल बनती गई। वर्तमान स्थिति में जिले में करीब 26 हजार स्मार्ट मीटर लगना बाकी है और परियोजना की पूर्णता की कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर स्मार्ट मीटर योजना का पूरा लाभ उन्हें कब मिलेगा।
मई माह के बिजली बिलों ने जिले के अनेक उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद सामान्य खपत वाले परिवारों को भी अपेक्षा से अधिक राशि के बिल मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोग अपनी समस्या लेकर बिजली कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। बुधवार को कांग्रेस ने भी स्मार्ट मीटर के कारण बढ़े बिजली बिलों का मुद्दा उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक बिलिंग व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक स्मार्ट मीटर को लेकर संदेह बना रहेगा।
स्मार्ट मीटर परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य बिजली चोरी पर नियंत्रण और फॉल्ट की त्वरित पहचान बताया गया था। विभाग का दावा था कि नई तकनीक के माध्यम से बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में समस्या का स्थान आसानी से पता चल सकेगा और चोरी पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आती है। कई इलाकों में बिजली बंद होने पर उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है और विभाग को फॉल्ट खोजने में पहले जैसी ही परेशानी होती है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में तारों से अवैध कनेक्शन लेकर बिजली चोरी किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।