CG Congress Clash: छत्तीसगढ़ के महासमुंद में कांग्रेस की गुटबाजी एक बार फिर सामने आई, जहां जिला कार्यालय में दो नेताओं के बीच मारपीट और तोड़फोड़ हुई।
CG Congress Clash: विधानसभा चुनाव में हार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर छत्तीसगढ़ में चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। इस बार मामला महासमुंद जिले से जुड़ा है, जहां पार्टी के भीतर की गुटबाजी ने हिंसक रूप ले लिया और जमकर हंगामा देखने को मिला। गुरुवार को महासमुंद स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी।
बताया जा रहा है कि इस प्रेसवार्ता में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की उपस्थिति उम्मीद से काफी कम रही। इसी बात को लेकर आपसी नाराजगी इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष निर्मल जैन और वर्तमान जिला उपाध्यक्ष व पार्षद विजय साव के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई। विवाद के दौरान कार्यालय परिसर में जमकर तोड़फोड़ भी की गई। कुर्सियां फेंकी गईं और कांच के सामान को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
जानकारी के मुताबिक, यह प्रेसवार्ता महंगाई के मुद्दे पर आयोजित की गई थी। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ गई, जिसने पूरे आयोजन को विवादित बना दिया। घटना के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को दी जाएगी और जांच के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रित किया। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस संगठन की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से संगठन के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। कई जिलों में स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों के बीच तालमेल की कमी, नेतृत्व को लेकर असहमति और कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद संगठन को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ गई है, लेकिन कई जगहों पर आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। महासमुंद सहित अन्य जिलों में भी समय-समय पर गुटीय विवाद और आपसी टकराव की घटनाएं चर्चा में रही हैं, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ने की आशंका जताई जाती है।