कर्ज में डूबने और बेटे की शादी में लड़की वालों की मांग को पूरा न कर पाने की वजह से किसान ने कर ली आत्महत्या
महोबा. केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की कर्जमाफी को लेकर भले ही चिंतित दिखाई पड़ती हो लेकिन अभी भी कर्ज़ के बोझ में दबे किसान मौत को गले लगाने के लिए मजबूर हैं। हम बात कर रहे हैं बुन्देलखण्ड के सबसे पिछड़े जनपद महोबा की, जहाँ दैवीय आपदाओं से किसान पूरी तरह टूट चुका है। इस बर्ष भी कम वर्षा होने से सूखा पड़ा है, तो वहीं दूसरी तरफ कर्ज़ के बोझ में दबे किसान हताश नजर आ रहे हैं। इसी तरह कर्ज से परेशान एक किसान ने मौत को गले लगा लिया।
पैसों की कमी से नहीं हो पाई बेटे की शादी
दरअसल, मामला खन्ना थाना कस्बा क्षेत्र का है, जहां किसान ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। 52 वर्षीय किसान वरदानी ने बेहतर खेती के लिए इलाहबाद बैंक से 75 हजार रुपये का कर्ज तीन वर्ष पूर्व लिया था। उसे उम्मीद थी कि फसल अच्छी होने पर वो बैंक का कर्ज चुका देगा। मगर लगातार तीन वर्षों तक अच्छी फसल न होने पर किसान मायूस हो गया। बैंक का कर्ज चुकाना तो दूर, उसने अपने बेटे की शादी और घर खर्च के लिए गांव के साहूकारों से भी एक लाख रुपये कर्ज ले रखा था। 25 जून को बेटे की शादी में पैसों की कमी के चलते व्यवस्थाएं न कर पाने से हुई बेइज्जती पर भी आहत था।
खेती का बहाना बना कर ली आत्महत्या
मृतक किसान का बेटा लक्ष्मी बताता है कि उसके पिता शाम 6 बजे अपने खेतों की ओर गए थे लेकिन रात बीत जाने पर वापस नहीं आये। इसके बाद उन्हें की बहुत कोशिश की गयी लेकिन वो नहीं मिले। उसने बताया कि हम सुबह खेत के की ओर पहुँचे, तो उनका शव एक पेड़ से लटकता मिला। किसान की मौत की सूचना मिलते ही गाँव के लोग खेत मे इकट्ठा हो गए। वहीं, आत्महत्या किये जाने की सूचना पर खन्ना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
योगी सरकार से मदद की आस
परिजनों ने बताया कि मृतक किसान के ऊपर इलाहाबाद ग्रामीण बैंक और साहूकारों का कर्ज था। कर्ज़ को लेकर किसान काफी दिनों से हताश ओर परेशान चल रहा था। वहीं दूसरी तरफ सूखे के चलते सिंचाई की व्यवस्था न होने से खेत भी वीरान पड़े हैं। किसान इसी बात से खासा चिंतित था इसलिए उसने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अभी भी किसान का परिवार कर्ज को लेकर चिंतित है और योगी सरकार की तरफ से मदद की आस लगाए है।