महोबा

भागीरथी प्रयास को मिला समर्थन, बढ़ गया कारवां

भागीरथी प्रयास को मिला समर्थन, बढ़ गया कारवां

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Jun 03, 2018
mahoba
भागीरथी प्रयास को मिला समर्थन, बढ़ गया कारवां

महोबा. कौन कहता है कि आसमां पर छेद नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो। ये पक्तियां महोबा के समाजसेवी बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार पर सटीक बैठती है। जो भागीरथी प्रयास से महोबा में पानी की समस्या पर दिनरात मेहनत कर रहे है। उनकी मेहनकट ने रंग दिखाना भी शुरू कर दिया है। देखते-देखते अब उनका यह प्रयास कारवां का रूप ले चुका है। महोबा शहर के दो हजार फिट पर बने गोरखगिरि पर्वत पर सरोवर है जिसे बचाने और गहरीकरण को लेकर एक मुहीम चल पड़ी है। शासन-प्रशासन की मदद के बगैर तारा पाटकार ने इस कार्य को आरम्भ किया जो जाकर अब एक आंदोलन का रूप ले चुका है। क्या सामजसेवी, शहर के जागरूक नागरिक, बच्चे और महिलाएं हाथों में फावड़े लेकर खुदाई के काम में लगे हुए है। शहर के एक सैकड़ा लोग रोज सुबह यहां पहुंचकर श्रमदान कर रहे है।

महोबा का जितना ऐतिहासिक महत्व है उल्टा ही यहां की उपेक्षा के कारण महोबा न केवल पिछड़ता जा रहा है है बल्कि अपनी पहचान भी खोता जा रहा है। पानी के संरक्षण के लिए सरकारों द्वारा कोई खास पहल न किये जाने से भी यहां के हालात बिगड़े है। मगर अब समाजसेवी इसको लेकर आगे आये है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार ने भागीरथी प्रयास शुरू किया है।

गोरखगिरि पर्वत में बने सरोवर को फिर से जीवित करने के लिए खुदाई का काम आम नागरिकों द्वारा किया जा रहा है । तारा पाटकार वही सख्स है जिन्होंने महोबा में ईएमएस की मांग को लेकर कई आंदोलन चलाये और आज भी प्रयासरत है। उनकी इस पहल का आम आदमी ही कायल है । 15 दिन पूर्व तारा पाटकार ने अकेले ही तालाब खुदाई का काम शुरू किया जो अब एक बड़ा कारवां बन चूका है । शहर की पालिका अध्यक्ष सहित तमाम जागरूक लोग इस कार्य में लगे हुए है । पहाड़ के ऊपर सुबह से ही लोग खुदाई के कार्य में लग जाते है । छोटे , बड़े, बुजुर्ग सभी श्रमदान कर रहे है । अब इसका असर भी देखने को मिलने लगा है । यदि ऐसे ही श्रमदान करने वालो की संख्या बढ़ती गई तो इतनी उचाई पर भी पानी का बड़ा भण्डारण देखने को मिलेगा । बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार बताते है कि महोबा में सूखा सबसे बड़ी समस्या है । लगातार खिसकते जलस्तर का एक बड़ा कारण है जल का भण्डारण न होना । ऐसे में उनका ये प्रयास लोगो को जागरूक भी कर रहा है है।

उन्होंने बताया कि यहां तमाम ऐतिहासिक सरोवर,बेहर,कुएं है लेकिन सूखे के दौर के बाद यह अस्तित्वविहीन हो गए । शासन-प्रशासन ने कोई भी ध्यान नहीं दिया नतीजन यहाँ के लोग पानी की समस्या झेलने के लिए मजबूर है । ऐसे में अपनी मातृभूमि का कर्ज उतारने के लिए अब यहाँ के लोगों को जल संजीवनी उपलब्ध कराने के लिए खुद आगे आना पड़ा है। वो बताते है कि शहर का गोरखगिरि महज एक पर्वत ही नहीं बल्कि यह आध्यात्मिक उर्जा का केंद्र भी है।

Published on:
03 Jun 2018 02:45 pm