Mahoba Student Suicide:महोबा में इंटर पास छात्रा ने फंदे से लटककर जान दे दी। छात्रा आगे बीए करना चाहती थी, लेकिन परिजनों ने उसकी शादी तय कर दी थी। परिवार के मुताबिक वह शादी को लेकर तनाव में थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।
महोबा में 18 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या की घटना ने सभी को झकझोर दिया है। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रा आगे बीए करना चाहती थी और पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाना चाहती थी। परिवार के लोगों ने उसकी शादी तय कर दी थी, जिसके बाद वह लगातार तनाव में रहने लगी थी। परिजनों के अनुसार छात्रा ने कई बार अपनी इच्छा जाहिर की थी कि वह अभी शादी नहीं करना चाहती। इसके बावजूद रिश्ता तय होने से वह मानसिक दबाव में आ गई। उसने घर के अंदर फंदा लगाकर जान दे दी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
चरखा के मुहल्ला रायसिंह निवासी मितलेश काशीप्रसाद इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा थी। परिवार के मुताबिक करीब एक साल पहले उसकी शादी हमीरपुर जिले के मुस्करा थाना क्षेत्र के टोला गांव में तय की गई थी। दो दिन पहले छात्रा ने अपनी मां से साफ कहा था कि वह आगे पढ़ना चाहती है और अभी विवाह नहीं करना चाहती। उसने यह भी बताया था कि उसका कहीं और संबंध तय करने की चर्चा चल रही है, इसलिए वहां रिश्ता न किया जाए। हालांकि परिवार ने उसकी बात को सामान्य तौर पर लिया। किसी को अंदाजा नहीं था कि छात्रा अंदर ही अंदर इतना तनाव झेल रही है और आत्मघाती कदम उठा सकती है।
सुबह काफी देर तक छात्रा कमरे से बाहर नहीं निकली तो परिजनों को चिंता हुई। दरवाजा खोलकर देखा गया तो वह फंदे से लटकी मिली। यह दृश्य देखते ही घर में चीख-पुकार मच गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतका के पिता ने बताया कि बेटी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी और शादी को लेकर परेशान रहती थी।
थाना प्रभारी खरेला नन्हेलाल यादव ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि किशोरी आगे पढ़ना चाहती थी, जबकि परिजनों ने उसकी शादी तय कर दी थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
छात्रा की मौत के बाद इलाके में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े फैसलों में उनकी इच्छा को भी महत्व दिया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर परिवार सामाजिक दबाव या परंपराओं के कारण जल्द शादी का फैसला ले लेते हैं, जबकि कई बच्चे आगे पढ़ाई कर अपने सपने पूरे करना चाहते हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते छात्रा की बात को गंभीरता से लिया जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।