
Kargil Vijay Diwas: करगिल विजय दिवस पर सूबेदार मेजर ऑनरी लेफ्टिनेंट बृजेश कुमार ने 1999 के युद्ध की यादें साझा कीं। 31 जुलाई को सेना से सेवानिवृत्त हो रहे बृजेश कुमार ने बताया कि 9 फरवरी 1999 को विवाह के महज नौ दिन बाद 18 फरवरी को उन्हें कुपवाड़ा पोस्टिंग का आदेश मिला और वे मातृभूमि की रक्षा के लिए रवाना हो गए।
कुछ महीनों बाद पाकिस्तान की घुसपैठ ने करगिल युद्ध का रूप ले लिया और उनकी यूनिट को द्रास सेक्टर पहुंचने के आदेश मिले। 11 जून 1999 की रात भारतीय जवानों ने द्रास बेस से तोलोलिंग की चढ़ाई शुरू की। लांस नायक बृजेश कुमार ने बताया कि ऊंचाई पर बैठे पाकिस्तानी सैनिकों की गोलियों के बीच भी भारतीय जवानों के हौसले बुलंद थे। मुकाबला इतना नजदीक पहुंच गया कि आमने-सामने की लड़ाई हुई और दुश्मनों को बंकरों से खींचकर मार गिराया गया।
बृजेश बताते हैं कि सुबह तक पहाड़ी पर 48 पाकिस्तानी सैनिकों के शव पड़े थे। हालांकि, इस जीत की भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिसमें कंपनी कमांडर मेजर विवेक गुप्ता सहित आठ जवान वीरगति को प्राप्त हुए। तिरंगा फहराने की खुशी थी, लेकिन साथियों को खोने का दर्द कहीं बड़ा था। तोलोलिंग के बाद ब्लैक रॉक पर भी सैनिकों ने वीरता दिखाई। बृजेश कहते हैं कि करगिल ने सिखाया कि देश के लिए जवान अपनी जान की परवाह नहीं करता।
कारगिल विजय दिवस स्वतंत्र भारत के सभी देशवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिवस है। भारत में प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध हुआ था जो लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई के दिन उसका अंत हुआ और इसमें भारत विजय हुआ। कारगिल विजय दिवस युद्ध में शहीद हुए भारतीय जवानों के सम्मान हेतु यह दिवस मनाया जाता है।
1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद भी कई दिन सैन्य संघर्ष होता रहा। इतिहास के मुताबित दोनों देशों द्वारा परमाणु परीक्षण के कारण तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को शांत करने के लिए दोनों देशों ने फरवरी 1999 में लाहौर में घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। जिसमें कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का वादा किया गया था लेकिन पाकिस्तान ने अपने सैनिकों और अर्ध-सैनिक बलों को छिपाकर नियंत्रण रेखा के पार भेजने लगा और इस घुसपैठ का नाम "ऑपरेशन बद्र" रखा था।
प्रारम्भ में इसे घुसपैठ मान लिया था और दावा किया गया कि इन्हें कुछ ही दिनों में बाहर कर दिया जाएगा लेकिन नियंत्रण रेखा में खोज के बाद इन घुसपैठियों के नियोजित रणनीति के बारे मे पता चला जिससे भारतीय सेना को एहसास हो गया कि हमले की योजना बहुत बड़े पैमाने पर की गयी है। इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन विजय नाम से 2,00,000 सैनिकों को कारगिल क्षेत्र मे भेजा। यह युद्ध आधिकारिक रूप से 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। इस युद्ध के दौरान 527 सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया और 1400 के करीब घायल हुए थे।