
मैनपुरी। वैसे तो देशभर में विजयादशमी के पर्व पर शनिवार को रावण दहन किया गया, लेकिन यूपी के मैनपुरी जिले में रविवार को रावण का पुतला जलाया गया। शहर के रामलीला मैदान में रावण वध का मंचन किया गया। जिसके बाद श्रीराम के स्वरूप ने अग्निबाण से रावण के पुतले में आग लगाई। रावण दहन देखने के लिए रामलीला मैदान में हजारों लोग एकत्रित हुए। रावण दहन होते ही पूरा मैदान श्रीराम की जयकारों से गूंज उठा।
जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा मैदान
श्रीरामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में देर शाम रावण वध और रावण दहन देखने के लिए जिलेभर से लोगों की भीड़ उमड़ी। राम और रावण के बीच हुए युद्ध में राम-लक्ष्मण अपनी धनुविद्या का जौहर दिखाते हुए राक्षसी सेना को मौत के घाट उतारने लगे। राम और लक्ष्मण ने रावण पर कई वाण छोड़े लेकिन रावण नहीं मरा। विभीषण ने रावण की नाभि में अमृत का भेद बताया तो राम ने अग्निबाण से उसकी नाभिकुंड के अमृत को सोख कर निरंतर वाणों की वर्षा कर उसे धराशायी कर दिया। जिसके बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। रावण दहन होते ही श्रीराम की जयकारों से पूरा रामलीला मैदान गूंजा उठा।
इसलिए एकादशी को होता है रावण दहन
वैसे तो प्रत्येक रामलीला में रावण वध और रावण दहन दशमी के दिन किया जाता है, लेकिन मैनपुरी की ऐतिहासिक रामलीला में रावण वध और रावण पुतला दहन एकादशी के दिन किया जाता है। बताया जाता है कि सन 1800 में मैनपुरी के राजा महाराज तेज सिंह ने रामलीला की शुरुआत एक दिन विलंब से की थी। दशमी के दिन तेज सिंह का जन्म दिन भी होता था। इसलिए वे विजयादशमी को पूजा करते थे और एकादशी को रावण वध की लीला होती थी। तभी से लगातार रामलीला में रावण वध और पुतला दहन एकादशी के दिन ही होता है।