MP News: एमपी के मंडला जिले के नैनपुर कस्बे का चौंकाने वाला मामला, शराब की दुकान से शराब खरीदती दिखीं सरकारी स्कूल की छात्राएं, सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें और वीडियो
Mandla News: मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सरकारी स्कूल की छात्राओं द्वारा शराब खरीदे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना की तस्वीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीरें सामने आते ही प्रदेश भर में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग सकते में आ गए। वहीं सोशल मीडिया पर भी यूजर्स में आक्रोश नजर आ रहा है। मामला सामने आते ही गुस्साए स्थानीय लोगों ने भी विरोध जताते हुए दुकानदार का लाइसेंस रद्द करने की मांग की है।
एमपी के आदिवासी बहुल मंडला जिले के नैनपुर स्थित सरकारी स्कूल की छात्राओं की इन तस्वीरों में वे यूनिफॉर्म में नजर आ रही हैं। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि दो छात्राएं शराब की दुकान के पास पहुंचीं और एक कुछ दूरी पर रुक गई। जबकि एक छात्रा शराब दुकानदार से शराब खरीदती है। बैग में रखती है। इस दौरान दोनों ही छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म की चुन्नी से खुद का चेहरा छिपाती नजर आ रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन एक्टिव हो गया। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बेखौफ शराब दुकानदार के नाबालिग को शराब बेचने की इस घिनौनी करतूत और कानून का उल्लंघन करने के मामले को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। आबकारी विभाग को मामले की जांच करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद शराब दुकानदार के खिलाफ तुरंत एक्शन लेते हुए आबकारी विभाग ने 2 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। मामले की जांच भी शुरू की गई है।
नाबालिग बच्चियों को शराब बेचने के इस सनसनीखेज मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने एमपी बीजेपी की मोहन सरकार और आबकारी विभाग पर जमकर हमला बोला है। पूर्व विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने इस मामले को बड़ी लापरवाही कहा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जिन बच्चियों को विद्या के मंदिर में होना चाहिए, वे अंग्रेजी शराब दुकान से शराब खरीद रही हैं। वहीं दुकानदार भी बिना किसी पूछताछ के नाबालिगों को शराब बेचता नजर आया।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी आक्रोश नजर आया है। लोगों का कहना है कि दुकानदार का लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने दुकान को यहां से हटाकर नगर क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की मांग भी की है।
मंडला के नैनपुर की ये शर्मनाक घटना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के लिए गंभीर चेतावनी है। वहीं कानून व्यवस्था पर सवाल उठा दिए हैं।