
Mandsaur News : अब गांवों की पहचान सिर्फ खेतों में लहलहाती फसलों और खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में शुरू हुई 'एक पंचायत-एक उद्योग' की पहल गांवों की तस्वीर बदलने लगी है। जिन गांवों में अब तक रोजगार के लिए युवाओं को शहरों की ओर रुख करना पड़ता था, वहां अब उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर काम के अवसर तैयार हो रहे हैं। जिले की 376 ग्राम पंचायतों में अब तक 739 उद्योग स्थापित किए जा चुके हैं। इन इकाइयों में 182 करोड़ 33 लाख रुपए का निवेश हुआ है और करीब 3500 ग्रामीणों को रोजगार मिला है।
खास बात ये है कि, इस पहल में कृषि उपकरण निर्माण से लेकर ऑयल मिल, मसाला उद्योग और गार्लिक प्रसंस्करण जैसी इकाइयां शामिल हैं। अब जिले की शेष 92 ग्राम पंचायतों में भी उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। लक्ष्य है कि, गांवों में उपलब्ध संसाधनों, स्थानीय जरूरतों और युवाओं की रुचि के अनुरूप उद्योग विकसित हों, ताकि रोजगार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का भी विस्तार हो।
'एक पंचायत-एक उद्योग' पहल को उद्योग विभाग और जिला पंचायत मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। योजना का उद्देश्य हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक उद्योग स्थापित करना है। इसके लिए सिर्फ इकाइयां लगाने का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया, बल्कि इच्छुक ग्रामीणों को उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित भी किया जा रहा है।
योजना के तहत गांवों में ऐसे लोगों की पहचान की जाती है, जो खुद का उद्योग या व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। इसके बाद उनकी रुचि, योग्यता और आर्थिक क्षमता के अनुसार काउंसलिंग की जाती है। उन्हें बताया जाता है कि, गांव में उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप कौनसा उद्योग शुरू किया जा सकता है।
उद्योग स्थापना के लिए विभिन्न शासकीय योजनाओं के जरिए ऋण उपलब्ध कराने में भी सहायता दी जाती है। इस प्रक्रिया से ग्रामीण युवाओं को उद्यमी बनने का अवसर मिल रहा है। वो सिर्फ नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि अपने गांव में उद्योग स्थापित कर दूसरों को रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं। इससे गांवों में रोजगार के नए विकल्प तैयार होने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को गति मिल रही है।
मंदसौर जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यहां स्थापित किए जा रहे उद्योगों में कृषि और उससे जुड़े कारोबार को भी प्राथमिकता मिल रही है। योजना के तहत कृषि उपकरण निर्माण, ऑयल मिल, मसाला उद्योग और गार्लिक प्रसंस्करण जैसी इकाइयां स्थापित की गई हैं। मंदसौर लहसुन उत्पादन के लिए भी जाना जाता है। ऐसे में गार्लिक प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की संभावनाएं खोलते हैं। इसी तरह मसाला उद्योग और ऑयल मिल जैसी इकाइयां भी कृषि आधारित कारोबार को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष ये है कि, गांवों में उपलब्ध कच्चे माल और स्थानीय संसाधनों का उपयोग गांव में ही उद्योग स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। इससे किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए कृषि आधारित व्यवसाय की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही प्रसंस्करण और निर्माण गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
468 पंचायतों तक पहुंचने का लक्ष्य
जिले में अब तक 376 ग्राम पंचायतों में 739 उद्योग स्थापित किए जा चुके हैं। शेष 92 पंचायतों में भी उद्योग स्थापना की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के अनुसार, मार्च तक 468 ग्राम पंचायतों में उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, जिले में 4500 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान में करीब 3500 लोगों को इन उद्योगों के माध्यम से रोजगार मिल चुका है। आने वाले समय में नई इकाइयों की स्थापना के साथ रोजगार का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। योजना की सफलता केवल उद्योगों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके नियमित संचालन, उत्पादन क्षमता और बाजार से जुड़ाव से भी तय होगी। इसके लिए ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहायता के साथ बाजार की मांग, उत्पादों की गुणवत्ता और कारोबार के विस्तार की जानकारी देना भी महत्वपूर्ण होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ मंदसौर जिले में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की तैयारी भी की जा रही है। इसके तहत गांधीसागर से धर्मराजेश्वर और भगवान पशुपतिनाथ तक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है।
वर्ष 2028 में उज्जैन में प्रस्तावित सिंहस्थ को देखते हुए धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे मंदसौर जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी।
गांधीसागर अभयारण्य में मादा चीता निर्वा को छोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे वन्यजीव पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने पर होटल, परिवहन, खानपान, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इस तरह जिले में एक ओर पंचायत स्तर पर उद्योग स्थापित कर ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास है, तो दूसरी ओर पर्यटन के माध्यम से स्थानीय कारोबार को विस्तार देने की तैयारी है।
'एक पंचायत-एक उद्योग' की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के पारंपरिक विकल्पों से आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य गांवों में ऐसी आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है, जिनसे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सके और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिले। अब तक 182 करोड़ 33 लाख रुपए का निवेश और करीब 3500 लोगों को मिला रोजगार इस पहल के शुरुआती परिणाम हैं। आने वाले समय में शेष पंचायतों में उद्योग स्थापना और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए अवसर मिलने की संभावना है।
जिला उद्योग विभाग के प्रबंधक मंगल रैयकवार का कहना है कि, 'एक पंचायत-एक उद्योग' के तहत जिले की हर ग्राम पंचायत में उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य है। अब तक 376 पंचायतों में 739 उद्योग स्थापित हो चुके हैं, जिनसे करीब 3500 लोगों को रोजगार मिला है। शेष 92 पंचायतों में उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। आने वाले कुछ महीनों में प्रत्येक पंचायत में उद्योग स्थापित करने का प्रयास है।