सौगात पर माननियों ने साफे तो पहन लिए लेकिन अब काम शुरु नहीं करवा पा रहे
मंदसौर.
मिड इंडिया रेलवे फाटक क्रमांक 151 जहां अंडरब्रिज की पिछले 12 सालों की मांग फिर से खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। दोहरीकरण के नाम पर प्रोजेक्ट टलता जा रहा है। स्वीकृति के बाद से यह ब्रिज हाईट की उलझनों में उलझा था। चार बार नक्शे बदले। 18 फीट से 15 फीट और फिर 13 फीट और अंत में 10.5 फीट की ऊंचाई तय हुआ और मामला सुलझा तो अब इसमें रेलवे का पेंच फंसा। जनसौगात के इस ब्रिज के मुद्दे पर लगातार आ रही अड़चने सुलझने ही नहीं पा रही है। सालों पुरानी मांग पर अंडरब्रिज स्वीकृत हुआ तो माननीयों ने पूरा श्रेय लिया। यहां तक की क्षेत्रवासियों ने आयोजन कर स्वागत किया तो साफें पहनकर स्वागत भी करवा लिया और अब तक ब्रिज का काम ही शुरु नहीं करवा पा रहे है। ऐसे में अब जिन लोगों ने स्वागत किया था, वहीं आंदोलन की चेतावनी दे रहे है।
हर आधे घंटे में बंद होती फाटक, दिनभर परेशान होते लोग
करीब डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियां है और यह मुख्य मार्ग भी है। फाटक से २५ से २८ हजार लोग हर दिन परेशान हो रहे है। हर आधे घंटे में फाटक बंद होती है और कई बार आधे घंटे तक बंद रहती है। इसके चलते आवागमन बंद हो जाता है। अगस्त में रेलवे व जिला प्रशासन के बीच इसे लेकर बैठक हुई थी। इसमें ब्रिज में आ रही अड़चनों को सुलझाया गया था।
अड़चने सुलझी तो अब दोहरीकरण ने प्रोजेक्ट उलझा दिया
तमाम प्रकार की अड़चने सुलझ गई तो अब डीआरएम ऑफिस के वरिष्ठ मंडल इंजीनियर का २० अगस्त को नगरपालिका के पास पत्र आया। इसमें रतलाम-नीमच रेल लाईन का दोहरीकरण होना बताया है। इस कारण मिड इंडिया फाटक का अंडरब्रिज निर्माण दोहरीकरण तय होने के बाद किया जाना बताया। इससे वर्षों पुरानी मांग के पुरा होने का इंतजार फिर सपना बनता नजर आ रहा है। स्वीकृति के बाद करीब ६ माह पहले श्रेय लेने के लिए जनप्रतिनिधियों का स्वागत का कार्यक्रम यहां हुआ। इसमें सांसद-विधायक सहित नपाध्यक्ष का स्वागत साफा बांधकर किया था। लेकिन कभी हाईट को लेकर तो अब दोहरीकरण के नाम पर यह प्रोजेक्ट उलझा तो वह इसे सुलझा कर काम शुरु नहीं करवा पा रहे है। हाईट की उलझनों में रसूखदारों का हस्तक्षेप भी माना गया।
सीएम की घोषणा की राशि आई
अंडरब्रिज की लागत 7 करोड़ 65 लाख 68 हजार थे। यह रेलवे की और से 2018-19 के बजट में स्वीकृत हुआ था। इसमें आधी राशि रेलवे व आधी राशि नपा द्वारा वहन की जाना थी। अंडरब्रिज के लिए दलोदा में सीएम ने 4 करोड़ देने की घोषणा की। इसी घोषणा के अनुसार १ करोड़ की राशि नपा को मिल चुकी है। बाकी राशि भी आने वाली है। ब्रिज का यह प्रोजेक्ट दोहरीकरण के चलते ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। काम शुरु नहीं हुआ और प्रोजेक्ट लेट हुआ तो सीएम की घोषणा के तहत मिलने वाली राशि भी लैप्स हो जाएगी।
रेलवे की चि_ी ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत
नपा ने १ करोड़ की राशि रेलवे को तय शर्तों के अनुसार भेजी थी, लेकिन रेलवे ने राशि लेने से इंकार करते हुए राशि लौटा दी। इसके लिए एक चि_ी नपा को मिली। इसमें रतलाम-नीमच के बीच होने वाले दोहरीकरण के काम के सर्वे के चलते इस प्रोजेक्ट को फिलहाल टालने की बात लिखी और दोहरीकरण के बाद इस पर फिर से प्लान बनाकर इस पर काम करने की कहा है। ऐसे में राशि नहीं लेने की बात कही। रेलवे की इस चि_ी के बाद यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। इधर ब्रिज की आस लगाए बैठे लोग जनप्रतिनिधियों की और उम्मीद लगाए बैठे है।
आंदोलन की तैयारी में जनता
क्षेत्र के आशीष गौड़, अनिल शर्मा, सुभाष अग्रवाल, गोपाल गुप्ता, मंगल बसेर सहित अन्य लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में डेढ़ दर्जन कॉलोनियां है और ऐसे में इसके लिए २५ से ३० हजार लोग हर दिन परेशान हो रहे है। हजारों लोगों से जुड़ी इस सौगात को बार-बार अड़ंगे लगाकर डाला जा रहा है और अब इसे ठंडे बस्ते में डाला जाने की चर्चाएं है। यहां अंडरब्रिज जरुरी है। सबकुछ तय हो चुका है और नपा को राशि भी मिल चुकी है तो फिर देरी क्यों। इसका काम शुरु नहीं हुआ तो जनआंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
सबकुछ तय होने के बाद करेंगे
दोहरीकरण का सर्वे हो जाएं, नक्शा भी बन जाएं, इसके बाद हम अंडरब्रिज के प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाकर कार्य शुरु कराएंगे।
- आरएन सुनकर, डीआरएम, रतलाम मंडल
जरुरी है अंडरब्रिज
अंडरब्रिज जरुरी है। हजारों जनता हर समय यहां परेशान हो रही है। रेलवे का पत्र जिला प्रशासन को प्राप्त हुआ है, इसमें दोहरीकरण के सर्वे के बाद अंडरब्रिज निर्माण की बात कही है। मैने कलेक्टर से बात की है। डीआरएम को जनता की परेशानी और तकनीकि दिक्कतें बताए। मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार राज्य सरकार से इसके लिए राशि आ चुकी है।
-यशपालसिंह सिसौदिया, विधायक