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कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पेट्रोल और डीजल के दाम में जारी रह सकती है कटौती

61.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा है ब्रेंट क्रूड 55.87 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ अमरीकी डब्ल्यूटीआई

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नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में भी नरमी देखने को मिल रही है। जिसकी वजह से आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती देखने को मिल सकती है। आपको बता दें कि आज दो दिनों की स्थिरता के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती देखने को मिली थी। पेट्रोल के दाम में 6 पैसे और डीजल की कीमत में 10 पैसे प्रति लीटर की कटौती देखने को मिली है। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल के दाम में इसी तरह की कटौती रही तो नवंबर के महीने में भी पेट्रोल और डीजल के दाम में राहत देखने को मिल सकती है।

क्रूड ऑयल के दाम में कटौती
पहले बात क्रूड ऑयल की कीमतों की बात करें तो अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड के दिसंबर डिलीवरी अनुबंध में 0.88 फीसदी की नरमी के साथ 61.03 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार चल रहा है। वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट का दिसंबर अनुबंध 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 55.87 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है।

पेट्रोल और डीजल के दाम में देखने को मिली कटौती
इंडियन ऑयल की बेवसाइट के अनुसार आज देश के चारों महानगरों में दो दिन की स्थिरता के बाद पेट्रोल और डीजल के दाम में कटौती देखने को मिली है। जिसकी वजह से दिल्ली, कोलकता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम घटकर क्रमश: 72.92 रुपए, 75.57 रुपये, 78.54 रुपए और 75.72 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। चारों महानगरों में डीजल के दाम भी घटकर क्रमश: 65.85 रुपए, 68.21 रुपए, 69.01 रुपए और 69.55 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं। आपको बता दें कि आज पेट्रोल के दाम में औसत कटौती 6 पैसे और डीजल की कीमत में 10 पैसे प्रति लीटर देखने को मिली है।

80 फीसदी तेल आयात करता है भारत
भारत अपनी तेल की जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है, जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल का दाम बढऩे से भारत में पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाते हैं। इसके विपरीत तेल के दाम में नरमी रहने से पेट्रोल और डीजल के दाम काबू में रहते हैं। वहीं इसका असर भारत में महंगाई पर भी पड़ता है। अगर देश में डीजल के दाम में बढ़ोतरी हो जाती है तो महंगाई में भी इजाफा होता है और दाम कम होते हैं तो महंगाई भी कंट्रोल में रहती है। वहीं विदेशी पूंजी भंडार में भी असर देखने को मिलता है। क्रूड ऑयल के दाम जितने ज्यादा होंगे विदेशी भंडार उतना ही कम होता रहेगा। क्रूड ऑयल खरीदने में ही सबसे ज्यादा सबसे ज्यादा विदेशी पूंजी खर्च होती है।

Updated on:
29 Oct 2019 01:45 pm
Published on:
29 Oct 2019 01:38 pm
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