टीसीएस के 10 हजार शेयर रखने वाले निवेशक को बायबैक ऑफर से होगा करीब 30 लाख रुपए का फायदा अगर किसी के पास एक लाख शेयर हैं तो निवेशक को 300 रुपए प्रति शेयर के मुनाफे साथ होगा 3 करोड़ का फायदा 3000 रुपए के प्रीमियम पर अपने शेयरों को निवेशकों से बायबैक कर रही है देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विस यानी टीसीएस ने एक घोषणा से कोरोना काल में अपने निवेशकों को करोड़पति और लखपति बना दिया है। बीते पांच सालों में यह दूसरा मौका है जब कपनी ऐसा कदम उठाने जा रही है। वास्तव में टीसीएस अपने शेयरों को आम निवेशकों से बायबैक कर रही है। जिसके लिए कंपनी का 16 हजार करोड़ रुपए खर्च करने को तैयार है। जानकारों की मानें तो कंपनी के पास नकदी ज्यादा होने से ऐसा कर रही है। कंपनी निवेशकों को 3000 रुपए के प्रीमियम पर ऑफर कर रही है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर टीसीएस का बायबैक प्लान आम लोगों को कैसे लखपति या करोड़पति बना देगा।
पहले कंपनी का बायबैक प्लान जानिए
सबसे पहले बात कंपनी के बायबैक प्लान पर बात कर लेते हैं। टीसीएस ने शेयर बायबैक का एलान किया है। जिसके तहत प्रति शेयर 3,000 रुपए के भाव पर 5,33,33,333 शेयर बायबैक किया जाएगा। इस तरह से टीसीएस अपने बायबैक प्रोग्राम पर करीब 16 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। आंकड़ों पर बात करें तो बुधवार को कंपनी का शेयर 2737.40 रुपए के भाव पर बंद हुआ था। टीसीएस ने 3000 रुपए पर शेयर बायबैक का एलान किया है। अगर दोनों कीमतों में अंतर देखें तो 262.60 रुपए यानी 9.6 फीसदी ज्यादा है। इसके पहले साल 2018 में भी टीसीएस ने 16 हजार करोड़ रुपए का ही शेयर बायबैक का ऐलान किया था। उस समय 2100 रुपए प्रति शेयर के भाव पर कंपनी ने 7.61 करोड़ शेयर खरीदे थे।
बन जाएंगे लखपति और करोड़पति
मान लीजिए किसी के पास कंपनी के 10 हजार शेयर हैं और3000 रुपए के प्रीमियम पर कंपनी को बायबैक करता है तो प्रति शेयर 262.60 रुपए के हिसाब से उसे 10 हजार शेयरों पर 26.30 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा हो जाएगा। वहीं बात ऐसे निवेशकों की करें तो जिनके पास एक लाख शेयर हैं तो उन्हें 2.62 करोड़ रुपए का मुनाफा होगा। 100 शेयर रखने वालों को इस फैसले स 26,200 और एक हजार शेयर रखने वालों को 2,62000 हजार मुनाफा होगा। मतलब साफ है कि कंपनी में छोटे और बड़े निवेशकों की चांदी होने वाली हैै।
किसे कहते हैं शेयसर बायबैक
अगर आपको शेयर बायबैक का मतलब नहीं पता है तो हम आपको बता देते हैं। जब कंपनी अपने शेयरों को निवेशकों से खरीदती है तो उसे बायबैक कहा जाता है। यह आईपीओ के बिल्कुल विपरीत होता है। कंपनियां शेयर बायबैक दो तरीकों से करती है पहला तरीका टेंडर ऑफर का होता है तो दूसरा ओपन मार्केट। जानकारों के अनुसार कंपनियां बायबैक ऑफर इसलिए लेकर आती है क्योंकि उन्हें अपना अतिरिक्त रुपया खर्च करना होता है। वहीं कई बात कंपनियां अपने शेयरों की कीमत में इजाफा लाने के लिए भी बायबैक करती है। जानकारों के अनुसार कंपनियों की बैलेंसशीट में अतिरिक्त कैश होना अच्छा नहीं माना जाता है।
क्या होता है प्रोसेस और शेयर पर असर
कंपनी अपने बायबैक आफॅर को बोर्ड के माध्यम से मंजूर कराती है। उसके बाद बायबैक का ऐलान किया जाता है। जिसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि के बारे में जानकारी दी जाती है। रिकॉर्ड डेट का मतलब उस दिन से होता है जिस तक निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे। वो ही लोग इस ऑफर का फायदा ले पाएंगे। इसका शेयरों पर किस तरह का असर पड़ता है। इस बारे में जानकार बताते हैं कि इससे कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह के असर देखने को मिलते हैं। इस प्रोसेस से ट्रेडिंग शेयरों की संख्या में कटौती होती है और शेयर की इनकम ममें इजाफा हो जाता है। इससे शेयर के पीई में भी इजाफा हो जाता है। वहीं कंपनी के कारोबार में किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिलता है।