
शेयर बाजार में आज अच्छी-खासी तेजी आई है। (PC: AI)
Share Market News: रुपया लगातार टूट रहा है, कच्चा तेल आसमान छू रहा है और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। लेकिन इन सबके बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी पलटी मारा कि निवेशक भी हैरान रह गए। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1000 अंक से ज्यादा उछल गया और 75,653 तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी करीब 1.5 फीसदी चढ़कर 23,760 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से बाजार में जो मायूसी छाई थी, उसमें अचानक आई यह तेजी किसी ठंडी हवा के झोंके जैसी लगी। बाजार बंद भी अच्छी-खासी बढ़त लेकर हुआ। बीएसई सेंसेक्स 789 अंक बढ़कर 75,398 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी-50 277 अंक बढ़कर 23,689 पर बंद हुआ।
बाजार पिछले चार-पांच कारोबारी सत्रों से काफी दबाव में था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 4 फीसदी तक टूट चुके थे। ऐसे में कई निवेशकों को लगा कि अच्छे शेयर सस्ते भाव पर मिल रहे हैं। बस फिर क्या था, बाजार में खरीदारी लौट आई। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल यह तेजी ज्यादा मजबूत नहीं है। इसे राहत वाली तेजी कहा जा सकता है। यानी बाजार में गिरावट इतनी ज्यादा हो गई थी कि अब थोड़ी रिकवरी दिख रही है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च हेड अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार में शॉर्ट कवरिंग भी देखने को मिली। जिन ट्रेडर्स ने गिरावट की उम्मीद में दांव लगाए थे, उन्होंने तेजी आते ही अपने सौदे काटने शुरू कर दिए। इससे बाजार को और सपोर्ट मिला। हालांकि, यह तेजी हर सेक्टर में नहीं दिखी। बाजार अभी सेक्टर आधारित मूवमेंट पर चल रहा है। मेटल शेयरों में पहले से मजबूती बनी हुई थी और अब कुछ बड़े दिग्गज शेयर भी रोटेशन के आधार पर बाजार को सहारा दे रहे हैं। मिश्रा का मानना है कि जब तक निफ्टी मजबूती से 24,000 के ऊपर नहीं निकलता, तब तक इस तेजी को लंबी रैली नहीं माना जा सकता। यानी अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
बाजार के सामने मुश्किलें भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी चिंता रुपये की कमजोरी है। गुरुवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.85 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। इस साल अब तक भारतीय मुद्रा करीब 7 फीसदी टूट चुकी है और एशिया की सबसे कमजोर करेंसीज में शामिल हो गई है। ऊपर से कच्चे तेल की कीमतों ने भी सरकार और बाजार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई, रुपये और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो रुपया 100 प्रति डॉलर तक भी जा सकता है।
विजयकुमार ने बताया कि विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। फिलहाल अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए विदेशी फंड वहां ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। जब तक यह ट्रेंड जारी रहेगा, भारतीय बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बना रह सकता है।
Updated on:
14 May 2026 04:29 pm
Published on:
14 May 2026 04:29 pm
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