liquor ban from Shri Krishna Janmabhoomi: योगी सरकार के फैसले के बाद से मथुरा में आज से संचालित अंग्रेजी शराब की 10, देसी शराब की 10, बियर की 10 और भांग की 7 दुकानें पर ताला लग जाएगा। इसके अलावा शहर के 3 होटलों के बार व दो मॉडल शॉप को भी आज से बंद कर दिया जाएगा।
बाकें बिहारी की नगरी मथुरा (Mathura) में श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Shri Krishna Janmabhoomi) के आसपास क्षेत्र में शराब बिक्री पर एक जून यानी आज से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही आज से शराब, बीयर व भांग की 37 दुकानों पर ताला लगा दिया जाएगा। जिसके बाद से क्षेत्र में शराब नहीं बिकने पाएगी। इसके अलावा शहर के 3 होटलों के बार व दो मॉडल शॉप को भी आज से बंद कर दिया जाएगा।
इतनी दुकानें होंगी बंद
बता दें कि पिछले साल 10 सितंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने ऐलान किया था कि श्री कृष्ण जन्मस्थान के आसपास के 10 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में शराब और मांस की बिक्री नहीं की जाएगी। उन्होंने मथुरा को तीर्थ स्थल घोषित करते हुए ये प्रतिबंध लगाया था। वहीं सीएम के आदेश के अगले दिन से ही मांस की बिक्री तो बंद हो गई थी लेकिन शराब की दुकानें अभी तक खोली जा रही थी। ऐसे में आज से शहर में अब तक संचालित अंग्रेजी शराब की 10, देसी शराब की 10, बियर की 10 और भांग की 7 दुकानें पर ताला लग जाएगा।
रामनगरी अयोध्या में भी लाइसेंस निरस्त
उधर, मथुरा की तर्ज पर रामनगरी अयोध्या में भी शराब की दुकानों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके अनुसार राम मंदिर क्षेत्र में आने वाली सभी शराब की दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान राज्य के आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि, अयोध्या में राम मंदिर क्षेत्र में आने वाली सभी शराब की दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। आबकारी मंत्री ने बताया कि आबकारी दुकानों की संख्या और स्थिति नियमावली 1968 बनाई गई है। इसमें समय-समय पर जरुरत के मुताबिक संशोधन किए जाते हैं।
संगम नगरी प्रयागराज में भी में उठी मांग
बता दें कि मथुरा और अयोध्या में मांस और शराब पर प्रतिबंध के बाद संगम नगरी प्रयागराज में भी मांस और शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग उठ रही है। विश्व हिंदू परिषद की तरफ से इस बावत सीएम योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजा गया है। पत्र में मांग करते हुए कहा गया है कि अगर सरकार ने जल्द ही इस मांग पर गौर नहीं किया तो जरुरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।