
Election Maheshwari Mahasabha 2026: राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा के 31 वें सत्र के लिए नए नेतृत्व के चुनाव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। आगामी 20 सितंबर 2026 को देशभर में मतदान कराया जाएगा। महासभा के विभिन्न पदों के लिए होने वाले इस चुनाव में देशभर के कुल 1,027 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए देशभर में पांच केंद्र निर्धारित किए गए हैं। चुनाव को लेकर माहेश्वरी समाज में खासा उत्साह है और सभी की निगाहें अब 20 सितंबर को होने वाले मतदान तथा उसके बाद सामने आने वाले परिणामों पर टिकी हैं।
राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा के चुनाव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से निर्वाचित मतदाता अपने-अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर पहुंचकर महासभा की नई कार्यकारिणी के लिए मतदान करेंगे। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों और क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए खंडेलवाल भवन, गोवर्धन रोड, मथुरा को मतदान केंद्र बनाया गया है। इस केंद्र पर कुल 121 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के संयोजक एवं मीडिया प्रभारी विनोद माहेश्वरी ने बताया कि मथुरा स्थित मतदान केंद्र पर उत्तर प्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा एनआरआई वर्ग के मतदाता भी मतदान करेंगे। उन्होंने बताया कि मतदान की सभी तैयारियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा रही हैं।
मथुरा के खंडेलवाल भवन स्थित मतदान केंद्र पर मतदान करने वाले 121 मतदाताओं में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 28, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 27, दिल्ली के 35, हरियाणा-पंजाब-हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर के 21 तथा एनआरआई वर्ग के 10 मतदाता शामिल हैं। इस तरह एक ही मतदान केंद्र पर विभिन्न क्षेत्रों के मतदाता एकत्र होकर महासभा के भावी नेतृत्व के चयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में बनाए गए मतदान केंद्र को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं। चुनाव में शामिल होने वाले मतदाताओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित पदाधिकारी सक्रिय हैं। खास तौर पर दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले मतदाताओं की सुविधा और मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा के इस चुनाव में कई महत्वपूर्ण पदों के लिए प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें सभापति, महामंत्री, अर्थ मंत्री, संयुक्त मंत्री, उपसभापति और संगठन मंत्री सहित विभिन्न पद शामिल हैं। चुनाव में सबसे अधिक चर्चा सभापति पद को लेकर है, जहां संदीप काबरा (जोधपुर) और त्रिभुवन रामेश्वर लाल काबरा के बीच मुकाबला है। सभापति पद महासभा के संगठनात्मक नेतृत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस पद के लिए होने वाले मुकाबले को लेकर देशभर के मतदाताओं और समाज के लोगों में विशेष रुचि बनी हुई है। दोनों प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
महासभा के महामंत्री पद के लिए भी मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पद पर अजय काबरा (भदोही-वाराणसी) और राजकुमार कल्या आमने-सामने हैं। अजय काबरा उत्तर प्रदेश से महामंत्री पद के प्रत्याशी हैं। उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस मुकाबले को लेकर माहेश्वरी समाज के बीच चर्चा बनी हुई है। महामंत्री का पद महासभा के प्रशासनिक और संगठनात्मक संचालन में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस पद के चुनाव को लेकर भी मतदाताओं के बीच काफी उत्सुकता है। चुनाव में शामिल अन्य पदों के प्रत्याशियों के बीच भी मुकाबला होने के कारण नई कार्यकारिणी का स्वरूप किस प्रकार सामने आता है, इसे लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्सुकता बनी हुई है।
राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा का चुनाव केवल पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे समाज के आगामी नेतृत्व और संगठन की भावी दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। महासभा देशभर में माहेश्वरी समाज को संगठनात्मक रूप से जोड़ने और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में नई कार्यकारिणी से समाज को नई ऊर्जा, बेहतर समन्वय और संगठन को आगे बढ़ाने की अपेक्षा है।
विनोद माहेश्वरी ने कहा कि महासभा का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे निर्धारित तिथि पर मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग करें और समाज के नेतृत्व के चयन में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता का वोट महासभा की आगामी दिशा और कार्यप्रणाली को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
20 सितंबर को होने वाले मतदान के साथ ही राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा के 31वें सत्र के लिए नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच जाएगी। देशभर के 1,027 मतदाता विभिन्न पदों के लिए अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करेंगे। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि महासभा की कमान किस नेतृत्व के हाथों में जाती है और आने वाले कार्यकाल में संगठन की प्राथमिकताएं क्या रहेंगी।
माहेश्वरी समाज के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई कार्यकारिणी के सामने समाज को एकजुट रखने, युवा पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने, सामाजिक गतिविधियों को विस्तार देने और देश-विदेश में संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। अब सभी की निगाहें 20 सितंबर पर हैं, जब मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर राष्ट्रीय माहेश्वरी महासभा के नए नेतृत्व की दिशा तय करेंगे।