
Rasik Dulari Death Case Row Mathura: संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण (मूल नाम: दीपक लोधी) की मौत का मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। मामले को लेकरश्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज समेत श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी का बयान सामने आ चुका है। वहीं अब मथुरा-वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े कुछ बाहरी शिष्यों की गतिविधियों और आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर जांच की मांग उठी है। इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल ने मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्लोक कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। आपको बताते हैं SSP श्लोक कुमार के बारें में जिनसे आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर जांच की मांग उठी है ।
अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पंडित संजय हरियाणा और श्री परशुराम शोभायात्रा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामगोपाल शर्मा के संयुक्त नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल SSP से मिला। ज्ञापन में आश्रम में रहने वाले शिष्यों के रिकॉर्ड, गोचरण भूमि, कथित मारपीट और एक शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत समेत कई मुद्दे उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम और नए आश्रम की व्यवस्थाएं संभाल रहे कुछ बाहरी शिष्यों की गतिविधियां जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए। शिकायतकर्ताओं ने आश्रम में रहने वाले शिष्यों का आधिकारिक रजिस्टर रखे जाने और उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी दिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
रामगोपाल शर्मा और पंडित संजय हरियाणा ने मांग की कि आश्रम की व्यवस्थाओं से संबंधित शिकायतों की बिंदुवार जांच कराई जाए, जिससे तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले में निष्पक्षता बरतने और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की अपील की।
ज्ञापन में खादर क्षेत्र की गोचरण भूमि को कथित तौर पर बेचे जाने का मामला भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में जांच कराए जाने की मांग की। इसके अलावा, शिष्यों पर आम लोगों और परिजनों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाते हुए पुलिस से आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की गई। शिकायतकर्ताओं ने हाल ही में आश्रम से जुड़े एक शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला भी उठाया। उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि मौत के कारणों और उससे जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।
प्रतिनिधिमंडल ने संत प्रेमानंद महाराज के नाम पर जुटाई जा रही कथित धनराशि और गाड़ियों के काफिले को लेकर भी सवाल उठाए। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि यदि महाराज स्वयं चंदा स्वीकार नहीं करते हैं, तो उनके नाम पर धन एकत्र करने और संपत्ति बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे धन के स्रोत की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आश्रम से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्ति के स्रोतों की पड़ताल की जाए। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
प्रतिनिधिमंडल ने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी चिंता भी व्यक्त की। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे महाराज को भ्रमित करके दूसरे इलाके में ले जाया गया है। उन्होंने इस संबंध में भी तथ्यों की जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि महाराज के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामले में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए पुलिस जांच और संबंधित तथ्यों का सामने आना जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल की शिकायत सुनने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने सभी बिंदुओं पर उचित और निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताते हुए कहा कि मथुरा-वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब मामले में पुलिस की जांच और सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।
श्लोक कुमार वर्ष 2014 बैच के IPS अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनकी पहली तैनाती आगरा में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर हुई थी। मथुरा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभालने से पहले वह रायबरेली, गाजियाबाद और हमीरपुर में भी तैनात रह चुके हैं। श्लोक कुमार ने वर्ष 2010 में बीआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) में काम किया। बाद में उनका रुझान सिविल सेवा की ओर हुआ और उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनके पिता बिहार कैडर में वरिष्ठ IAS अधिकारी रह चुके हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। पुलिस सेवा में आने के बाद श्लोक कुमार ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारियां निभाईं और अब मथुरा जिले की पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व कर रहे हैं।