वृंदावन में यमुना की लहरों पर शुक्रवार को जो चीख-पुकार मची थी, उसका दर्द शनिवार को और गहरा गया है। हादसे के दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अभी भी 5 लोग लापता हैं। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ समेत करीब 250 जवानों की टीम 14 किलोमीटर के दायरे में यमुना का कोना-कोना छान रही […]
वृंदावन में यमुना की लहरों पर शुक्रवार को जो चीख-पुकार मची थी, उसका दर्द शनिवार को और गहरा गया है। हादसे के दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अभी भी 5 लोग लापता हैं। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ समेत करीब 250 जवानों की टीम 14 किलोमीटर के दायरे में यमुना का कोना-कोना छान रही है। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, परिजनों की उम्मीदें अब सिसकियों में तब्दील होती जा रही हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अफसरों का कहना है कि लापता लोगों को ढूंढने में दो बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पहली वजह यमुना का तेज बहाव है, जिसके चलते आशंका है कि लोग बहकर काफी दूर निकल गए होंगे। दूसरी वजह नदी की गहराई में जमा गाद और कीचड़ है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बार शव रेत या कीचड़ में दब जाते हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि हादसे के 24 घंटे बीत जाने के बाद अब शव फूलकर पानी की सतह पर ऊपर आ सकते हैं। इसी उम्मीद में गोताखोर लगातार पानी के भीतर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
यह भीषण हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट के पास हुआ। बांके बिहारी मंदिर से महज 2 किलोमीटर दूर इस घाट पर 37 श्रद्धालुओं से भरी नाव अचानक पलट गई। जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां पानी करीब 25 फीट गहरा है। नाव के पलटते ही श्रद्धालुओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पांटून पुल की रिपेयरिंग कर रहे मजदूरों और अन्य नाविकों ने तुरंत पानी में छलांग लगाकर कई लोगों को बाहर निकाला, वरना मौतों का आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था।
इस त्रासदी ने कई घरों को उम्र भर का गम दे दिया है। मृतकों में एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं, जिनमें मां-बेटा, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे रिश्ते शामिल थे। पंजाब से कान्हा के दर्शन करने आए इन श्रद्धालुओं को क्या पता था कि उनकी यह धार्मिक यात्रा अंतिम यात्रा बन जाएगी। अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 22 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद फरार हुए आरोपी नाविक पप्पू निषाद को पुलिस ने रात करीब 9 बजे हिरासत में ले लिया है। जांच में सामने आया है कि नाव की क्षमता हालांकि 40 लोगों की थी, लेकिन नाविक ने सुरक्षा के बुनियादी नियमों की धज्जियां उड़ा दी थीं। श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया गया था, लेकिन किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या नाव की तकनीकी स्थिति सही थी और क्या नाविक के पास वैध लाइसेंस था।
हादसे से जुड़े दो वीडियो अब लोगों के रोंगटे खड़े कर रहे हैं। पहले वीडियो में श्रद्धालु भक्ति भाव से सराबोर होकर राधे-राधे का जाप कर रहे हैं, लेकिन दूसरा वीडियो दिल दहला देने वाला है। इस वीडियो में लोग खुद को बचाने के लिए पानी में हाथ-पांव मारते और आखिरी सांस तक जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। यमुना की लहरों के बीच उठती वो आखिरी पुकार अब प्रशासन और व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। घटनास्थल पर अभी भी भारी तनाव और गमगीन माहौल है।