
Umesh Chandra Pandey News: उत्तर प्रदेश के मऊ की मधुबन विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और भाजपा नेता उमेश चंद्र पांडेय एक बार फिर स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गए हैं। वजह है सोशल मीडिया पर चल रही उनकी बसपा में दोबारा वापसी की खबरें। हालांकि, इन अटकलों पर अब खुद उमेश चंद्र पांडेय ने विराम लगा दिया है।
पूर्व विधायक ने साफ कहा है कि उनके बसपा में जाने की कोई बात नहीं है और वह भाजपा के साथ ही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को बेबुनियाद बताते हुए इसे उनकी राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश करार दिया।
उमेश चंद्र पांडेय का सियासी सफर बहुजन समाज पार्टी से शुरू हुआ था। मधुबन विधानसभा क्षेत्र में उन्हें बसपा के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है। उपलब्ध राजनीतिक रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की और लगातार दो बार विधायक बने। दो चुनावों में जीत के बाद मधुबन की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाने लगी। हालांकि, 2017 का चुनाव उनके लिए अलग रहा। इस बार बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे उमेश चंद्र पांडेय को हार का सामना करना पड़ा।
2017 की हार के बाद भी उनका राजनीतिक सफर रुका नहीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर मधुबन से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन करीब तीन हजार वोटों के अंतर से जीत से दूर रह गए। इसके बाद उनके राजनीतिक सफर में एक और बड़ा बदलाव आया और वह भाजपा में शामिल हो गए। तब से वह भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति करते नजर आए हैं।
इसी बीच सोशल मीडिया पर उनके दोबारा बसपा में जाने की खबरें चलने लगीं। मधुबन में यह चर्चा तेजी से फैली तो स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी उनके अगले कदम को लेकर कयास लगने लगे। लेकिन उमेश चंद्र पांडेय ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, ताकि भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम पैदा हो और उनकी छवि प्रभावित हो।
उमेश चंद्र पांडेय ने अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के मजबूत सिपाही हैं और आगे भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी सक्रियता से कुछ लोग परेशान हैं और इसी वजह से उनके बारे में तरह-तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। सोशल मीडिया पर खबर फैलाने वाले व्यक्ति के पीछे किसका हाथ है, इसको लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
पूर्व विधायक ने भाजपा कार्यकर्ताओं और अपने समर्थकों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर आने वाली अपुष्ट खबरों को सच न मानें। उनका कहना है कि उनके राजनीतिक रुख को लेकर किसी भ्रम की जरूरत नहीं है। मधुबन की राजनीति में उमेश चंद्र पांडेय की खास बात यह है कि उनका सफर बसपा से शुरू होकर सपा और फिर भाजपा तक पहुंचा है। यही वजह है कि उनके किसी भी राजनीतिक कदम को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो जाती है। फिलहाल उन्होंने बसपा में वापसी की चर्चाओं को खारिज कर दिया है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मधुबन की सियासत में उनकी भूमिका और भाजपा के भीतर उनकी सक्रियता पर नजर बनी रहेगी।