थाने के पास से पकड़ी गर्इ शराब की पेटियां, मेडिकल कालेज प्रशासन गंभीर
मेरठ। मेरठ का मेडिकल कालेज जिसके कैंपस परिसर में ही मेडिकल थाना भी है। मेडिकल थाने में हर समय पुलिस की आवाजाही रहती है, लेकिन इसके बीच ही वहां पर शराब का गोदाम भी था। जिसकी भनक पुलिस को नहीं लगी। शराब ठेकेदार ने मेडिकल कालेज के प्राइवेट वार्ड के एक कमरे में शराब का गोदाम बना डाला। जहां पर छापे के दौरान करीब 200 पेटी शराब की पकड़ी गई। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब शराब रखे कमरे का दरवाजा खुला हुआ देखकर किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। शराब की पेटियां परिसर में मिलने पर मेडिकल कालेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में मेडिकल कालेज और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शराब जब्त कर ली। जांच में सामने आया कि शराब पूरी तरह वैध है, लेकिन उसे गलत स्थान पर रखा हुआ था। लिहाजा पुलिस मेडिकल कालेज प्रशासन की तरफ से तहरीर आने का इंतजार कर रही है।
रहने के लिए दिया था ठेकेदार को कमरा
मेडिकल कालेज में प्राइवेट वार्ड का एक कमरा सिविल कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार रजत त्यागी को रहने के लिए दिया हुआ है। गुरुवार सुबह कमरे का दरवाजा किसी वजह से खुला रह गया। किसी ने भीतर देखा तो उसमें विभिन्न कंपनियों की अंग्रेजी शराब की पेटियां रखी हुई दिखाई दी। इसकी सूचना कालेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अजीत चैधरी, चिकित्सा अधीक्षक डा. संजीव को दी गई। मौके पर पहुंचे इस लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। एसपी सिटी रणविजय सिंह मय फोर्स मौके पर पहुंचे और शराब जब्त की। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि पूरे प्रकरण में सिविल ठेकेदार रजत त्यागी की भूमिका सामने आई है। उसके निवेदन पर सामान रखने के लिए एक कमरा उसे दिया गया था। ई-ट्रेडिंग के जरिए बीते एक अप्रैल से ही रजत त्यागी को मेडिकल में निर्माण का ठेका मिला है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि सिविल ठेकेदार रजत त्यागी की इस करतूत के बाद मेडिकल कालेज प्रशासन ने उसका ठेका तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। साथ ही उसे ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवार्इ भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि रजत त्यागी के खिलाफ थाने में तहरीर दी जा रही है।
शराब के गोदाम से अधिकारी अनजान
सूत्रों की मानें मेडिकल कॉलेज में शराब का गोदाम कई वर्षों से चला आ रहा था। वर्तमान में मिली शराब तक्षशिला कालोनी शराब ठेके के ठेकेदार राजीव भाटी की है। जानकारी के मुताबिक मेडिकल कालेज में शराब रखने की एवज में वह छह हजार रुपये प्रतिमाह देता था।