मेरठ

अलग राज्य की मांग को लेकर यूपी में भाजपा, रालोद समेत सभी दल आए एक मंच पर, सबने भरी यह हुंकार

सबसे पहले रालोद ने हरित प्रदेश की मांग उठार्इ थी, अब अन्य दल भी जुड़े अलग प्रदेश की मांग को लेकर
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Updated: 12 Sep 2018, 4:19 PM IST
meerut
अलग राज्य की मांग को लेकर रालोद, भाजपा समेत सभी दल आए एक मंच पर, सबने भरी यह हुंकार

केपी त्रिपाठी, मेरठ। पश्चिम उप्र में अलग राज्य की मांग समय-समय पर उठती रही है, लेकिन अब जबकि 2019 के आम चुनाव सिर पर हैं तो ऐसे में फिर से पश्चिम उप्र के अलग राज्य की मांग का जिन्न फिर से बाहर निकलने लगा है। रालोद पहले से ही हरित प्रदेश की मांग करता रहा है, लेकिन अब पश्चिम उप्र के सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने एक मंच बनाकर अलग राज्य की मांग का मुद्दा छेड़ दिया है। इस मंच में सभी दलों के प्रमुख नेता हैं, जैसे भाजपा, कांग्रेस, रालोद, सपा और बसपा। रालोद के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सिंचाई मंत्री डा. मैराजुद्दीन इस मंच के मुखिया हैं। पत्रिका से हुई बातचीत में उन्होंने अलग राज्य क्यों और इसके फायदे के अलावा इससे होने वाले राजनैतिक लाभों पर भी खुलकर चर्चा की।

अराजनैतिक मंच बनाया गया

डा. मैराजुद्दीन ने बताया कि अलग राज्य की मांग के लिए राजनैतिक दलों से ऊपर उठकर एक मंच बनाया गया है जो कि अराजनैतिक हैं। इसमें सभी दलाें के लोग शामिल हैं। इस मंच के नीचे आकर न तो कोई भाजपाई है और न कोई कांग्रेसी या कोई रालोद का नेता है। इस मंच के नीचे आने वाले सभी पश्चिम उप्र के अलग राज्य की मांग करने वाले हैं।

पश्चिम उत्तर प्रदेश के हर आदमी की आवाज

उन्होंने कहा कि यह पश्चिम के हर आदमी की आवाज है। इतना बड़ा सूबा होने पर भी यहां के लोग कई चीजों में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम उप्र से इलाहाबाद और लखनऊ जाने की कोई कायदे की ट्रेन नहीं है। हवाई जहाज के कोई साधन नहीं हैं। इसके लिए पहले दिल्ली जाइये और वहां से जहाज लीजिए।

पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता है त्रस्त

डा. मैराजुद्दीन ने कहा कि पश्चिम उप्र की जनता त्रस्त है। यहां से हाईकोर्ट इलाहाबाद जाने और आने में चार दिन का समय लग जाता है। उन्होंने कहा यह इस क्षेत्र के लोगों की विडंबना है कि प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने वाले जिलों के लोगों को न्याय के लिए 700 किमी दूर तक जाना पड़ता है।

मांग करने वाले मंच पर आए एक साथ

डा. मैराजुद्दीन ने कहा कि अलग राज्य की मांग तो कई दशकों से उठ रही है। इसको उठाने वाले कई संगठन थे अब उनके प्रयास से भी एक साथ आए हैं। इनमें प्रथक हरित प्रदेश, गंगा प्रदेश, हरित प्रदेश जैसे संगठन शामिल हैं। प्रदेश विभाजन मोर्चा से बनाए गए इस मंच की मांग है कि इतने बडे़ उप्र को कई भागों में बांट दिया जाए। जैसे बुदेलखंड राज्य की मांग चल रही है।

करेंगे उपवास, भरवाएंगे शपथ पत्र

डा. मैराजुद्दीन ने बताया कि उनकी आगे की रणनीति आंदोलन को तेज करने की है। इसके लिए सामूहिक उपवास रखा जाएगा। सभी दलों के नेताओं को बुलाया जाएगा। जो नहीं आएगा उसका बायकाट किया जाएगा। इसके अलावा एक लाख शपथ पत्र भरवाने की योजना है। उन्होंने बताया कि पश्चिम के जिलों में आंदोलन धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है।

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