मेरठ

सरकार के पैकेज पर इस कद्दावर किसान नेता ने कही ये बड़ी बातें

उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा सरकार किसानों की नाराजगी खत्म करने के लिए जुटी  

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Jun 06, 2018
सरकार के पैकेज पर इस कद्दावर किसान नेता ने कही ये बड़ी बातें

मेरठ। उपचुनाव में मिली हार से भाजपा सरकार और उसके पदाधिकारी सकते में हैं। खासकर कैराना को भाजपा अपनी और सरकार की प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही थी। इसके चलते भाजपा सरकार के करीब आधा दर्जन मंत्री, विधायक और पदाधिकारी कैराना में डेरा जमाए हुए थे, लेकिन परिणाम हार के रूप में सामने आया। भाजपा इसका सबसे बड़ा कारण गन्ना किसानों की नाराजगी के रूप में देख रही है, इसलिए भाजपा सरकार गन्ना किसानों को सात हजार करोड़ का पैकेज देने की योजना बना रही है। जिससे प्रदेश में किसानों की नाराजगी दूर हो सके। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने गन्ना किसानों को 7000 करोड़ रुपये का बेल आउट पैकेज दिये जाने के भारत सरकार के विचार पर 'पत्रिका' से बात करते हुए कहा कि बेल आउट पैकेज गन्ना किसानों की समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। पूर्व में भी इस तरह के पैकेज दिये जाते रहे हैं। यूपीए सरकार द्वारा 6000 करोड़ रुपये व राजग द्वारा भी 1500 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया था, लेकिन किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। यह भी चुनावी शिगूफा है।

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किसानों को दिया वादा नहीं हो सका पूरा

2014 के आम चुनाव में एनडीए गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के चेहरे नरेंद्र मोदी ने खुलकर आम आदमी और किसानों की बात की थी। किसानों की आय दोगुना करने से लेकर कृषि ऋण, कृषि बीमा, सहित तमाम सहूलियतों पर उन्होंने ताल ठोक कर वादा किया था। किसानों के हित के लिए सरकार कोई भी कदम उठाने से नहीं हिचकेगी, लेकिन इन पूरे हुए चार सालों में केंद्र सरकार द्वारा किए वादे और किसानों की स्थिति में कोई बदलाव न होते देख इन दिनों किसान संगठन आंदोलनरत हैं कई राज्यों में सब्जियों को सड़कों पर फेंक कर विरोध जताया जा रहा है। दूध भी सड़क पर बहाया जा रहा है। ऐसे में किसान के मुद्दों पर घिरता देख मोदी मंत्रिमंडल 48 महीने की अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिए जो कार्ड जारी किया था उससे गन्ना किसानों को बाहर कर दिया गया था। सूत्रों की मानें तो कैराना में हुई हार भी किसान नीति पर मोदी के फेल होने का नतीजा रहा है। बीजेपी नेता और प्रधानमंत्री मोदी लगातार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कर्ज मुक्त करने के दावे और वादे तो करते रहे हैं। सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना चाहती है और सरकार इसके लिए प्रयास भी कर रही है, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात हैं किसानों का सब्र बार-बार टूट रहा है।

चीनी मिलाें पर सख्त हुई सरकार

मोदी और योगी सरकार चीनी मिलाें पर सख्त हो गई है। सरकार ने मिल संचालकों से कह दिया है कि जब तक किसानों का गन्ना खेत मे खड़ा है मिल रुकनी नहीं चाहिए। वहीं प्रत्येक मिल की समीक्षा प्रतिदिन की जा रही है। किस मिल ने किसानां के बकाये का भुगतान किया और उसका प्रतिदिन कितना बकाया है।

7000 करोड़ के पैकेज का मरहम

किसानों को अपने पाले में करने के लिए केंद्र सरकार गन्ना किसानों को 7000 करोड़ का पैकेज देने पर विचार कर रही है। यह पैकेज उन किसानों के लिए मरहम का काम करेगा, जिन्हें सरकार ने वादों का जख्म तो दिया, लेकिन उस पर राहत के लिए कोई मरहम नहीं दिया।

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Published on:
06 Jun 2018 12:45 pm
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