रासुका लगने के बाद बसपा के पूर्व विधायक की बढ़ती जा रही मुश्किलें
मेरठ। पूर्व विधायक और बसपा नेता योगेश वर्मा की मुसीबतें खत्म होने का नाम नहीं ले रही। जेल में बंद योगेश की रिहार्इ के लिए पत्नी और मेरठ महापौर सुनीता वर्मा भरसक प्रयास में जुटी हैं, लेकिन कानूनी रूप से मजबूत शिकंजे में जकड़े योगेश का अभी निकट भविष्य में जेल से बाहर आना संभव नहीं दिखाई दे रहा। रही सही कसर बुधवार को पूरी हो गई, जब उनकी जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने तीसरी बार योगेश की जमानत अर्जी खारिज की है। योगेश को दो अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारत बंद के दौरान तोड़फोड़ और सरकार विरोधी आपत्तिजनक नारे लगाने का दोषी मानते हुए जेल भेज दिया गया था। उन पर गंभीर धाराओं में 12 केस दर्ज हैं। इसके अलावा शासन से रासुका पहले ही लगी हुई है।
दो अप्रैल को जनसमूह को उकसाने का आरोप
योगेश के वकील ने अन्य केस में अपर जिला जज कोर्ट संख्या दो मानवेन्द्र सिंह के यहां पर जमानत अर्जी दी थी। जिसे मानवेंद्र सिंह ने खारिज कर दिया। जज को सरकारी वकील ने बताया कि बीती दो अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट में दिए गए निर्णय के विरोध में अभियुक्त ने सामूहिक जनसमूह को उकसाया, जिस पर लोगों ने आपत्तिजनक नारे लगाये और दुकानों में तोड़फोड़ और बवाल किया। मवाना में उपद्रवियों ने दुकान में घुसकर दुकानदारों से मारपीट और फायरिंग की। दुकान में रखे समान को भी लूटने का आरोप है। राह चलते लोगों के वाहनों को आग के हवाले किया गया और मारपीट की गई। कई सरकारी भवनों और सम्पत्तियों के साथ ही पुलिस चौकियों पर आग लगाई गई। उपरोक्त मामले में पूर्व बसपा विधायक योगेश वर्मा को आरोपी बनाया गया था। इसी मामले में जमानत के लिए सुनवाई अपर जिला जज कोर्ट संख्या दो के न्यायालय में हुई। योगेश की जमानत पर सरकारी वकील संदीप सैनी ने कड़ा विरोध जताया और उपरोक्त घटना को अपराध करार देते हुए जमानत अर्जी खारिज करने का अनुरोध किया। जिस पर अपर जिला जज मानवेन्द्र सिंह ने सुनवाई के बाद योगेश वर्मा की जमानत अर्जी को गम्भीर अपराध पाते हुए खारिज कर दिया है।
मायूस हुई मेयर, अब हार्इकोर्ट का सहारा
पति योगेश वर्मा की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद योगेश की पत्नी सुनीता वर्मा निराश हो गई है। उनका कहना है कि वे हाईकोर्ट इलाहाबाद में इसके खिलाफ अपील करेंगी।