अलीगढ़ में हुए जहरीली शराब कांड के बाद अब प्रदेशभर में आबकारी विभाग की नींद टूट रही है। आबकारी अफसर और प्रशासनिक अधिकारी शराब की दिकानों पर पहुंचकर वहां रखे स्टॉक की जांच कर रहे हैं।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ ( meerut news ) अलीगढ़ में हुए जहरीली शराब कांड ( Aligarh liquor scandal ) के बाद शासन ने प्रदेशभर में सख्ती कर दी है। इसके बाद आबकारी विभाग ( Excise department ) अधिकारियों की नींद टूटी है और उन्होंने देशी शराब दुकान की ओर दौड़ लगा दी है। आबकारी विभाग के साथ-साथ प्रत्येक जिलों में प्रशासनिक अधिकारी भी शराब की दुकानों की चेकिंग कर रहे हैं।
मेरठ महानगर की देशी सरकारी शराब की दुकानों पर शराब की चेकिंग के साथ ही बोतलों और पव्वों पर बार कोडिंग और हॉलमार्क चेक किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने स्टॉक रजिस्ट्रर भी चेक किया। सिटी मजिस्ट्रेट एसके सिंह ने आबकारी विभाग और इंस्पेक्टर कोतवाली आशुतोष सिंह के साथ महानगर की कई देशी शराब की दुकानों पर छापा मारा। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना था कि लोग सरकारी दुकानों से ही शराब खरीदें। वे शराब खरीदते समय अपने मोबाइल में बार कोड स्कैन कर शराब की गुणवत्ता को जांच सकते हैं। शराब के ठेकों पर छापामारी से हड़कंप मचा रहा। बता दें कि मेरठ में पिछले दिनों पंचायत चुनाव के दौरान जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हुई लेकिन आबकारी विभाग और प्रशासन की ओर से पूरे मामले में लीपापोती की गई।
आबकारी विभाग की नींद पंचायत चुनाव में नहीं टूटी। पूरे पंचायत चुनाव के दौरान आबकारी विभाग ने एक भी छापामार कार्रवाई नहीं की। जिसका नतीजा पंचायत चुनाव के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर जहरीली शराब के जाम छलके। एक अनुमान के मुताबिक अप्रैल माह में ही जहरीली शराब से जिले में करीब 14 लोगों की मौत हुई लेकिन आबकारी विभाग और पुलिस ने आंकड़ों में खेल करते हुए मरने वालों की संख्या 4 ही बताई। बाकी अन्य की मौत बीमारी के चलते बताई गई।