- आगजनी और पथराव के बाद बंद की गई थी इंटरनेट सेवाएं - बवाल के मामले में कैंट बोर्ड के सीओ ने 40-50 अज्ञात और आठ नामजद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
मेरठ. जम्मू-कश्मीर के हालातों से कौन वाकिफ नहीं होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में भी एक ऐसा शहर है, जो मामूली सी बात पर सांप्रदायिक दंगों की चपेट में आ जाता है। सोशल मीडिया ऐसी परिस्थिति में आग में घी का काम करती है। जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर में हिंसा होने पर सोशल मीडिया पर तेजी से अफवाह वायरल होती है। इसके बाद स्थिति बेकाबू हो जाती है। मजबूरन राज्य में इंटरनेट सेवा को बाधित करना पड़ता हैं। ठीक उसी प्रकार मेरठ शहर में हुआ और बुधवार रात करीब 11 बजे इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई। इसके चलते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिला प्रशासन ने गुरुवार सुबह करीब 11 बजे इंटरनेट सेवा चालू की गई।
दरअसल, मछेरान और भूसा मंडी में हिंसा भड़की तो वहां भी सोशल मीडिया में अफवाहों का बाजार गर्म हुआ। कहीं धार्मिक स्थल पर आग तो कहीं लोगों के मरने की अफवाहें उड़ने लगी। इस तरह की अफवाहों पर लगाम लगाने का मेरठ प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं था। लिहाजा बुधवार रात करीब 11 बजे इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इंटरनेट सेवा बंद हाेने के कारण अफवाहों पर तो रोक लग गई, लेकिन इससे जरूरी सेवाएं भी बाधित हो गई। इससे अधिकांश लोगों के काम बिना इंटरनेट के ठप हो गए।
इंटरनेट सेवा के बाधित होते ही लोगों केा परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिकांश लोगों को जिले की इंटरनेट सेवा बाधित होने की सूचना गुरुवार सुबह लगी जब वे सोकर उठे। सभी लोग अपने-अपने मोबाइल नेटवर्क कंपनियों में फोन कर जानकारी लेते रहे कि इंटरनेट सेवा कब तक बहाल होगी। ऑपरेटर यही जवाब देता रहा कि प्रशासन के अग्रिम आदेश तक के लिए ये सेवा बंद कर दी गई है। इंटरनेट सेवा चालू करने केा लेकर प्रशासन के हाथ-पांव फूले रहे। वहीं इस संबंध में जब जिलाधिकारी अनिल ढीगरा से बात की गई तो उनका कहना था कि इंटरनेट सेवा दस बजे के बाद चालू कर दी जाएगी। हालांकि इसके बाद भी इंटरनेट सेवा सुबह करीब 11 बजे चालू की गई।