मेरठ

मदरसे में पढ़ रहे छात्र सेना और रक्षा क्षेत्र में साबित कर सकेंगे अपनी योग्यता

यूपी सरकार ने 2009 में 11वीं पंचवर्षीय योजना के हिस्से के रूप में मदरसों (एसपीक्यूईएम) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना लागू की थी। इस योजना का उद्देश्य विज्ञान को शामिल करके मदरसों का आधुनिकीकरण करना था। मदरसा छात्रों के लिए उनके पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण में गणित, हिंदी और अंग्रेजी को भी शामिल किया गया।
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Updated: 12 Oct 2021, 11:05 AM IST
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गहलोत सरकार द्वारा मदरसों के पांचवीं बोर्ड के विद्यार्थियों का परीक्षा शुल्क माफ किए जाने का मामला अब पकड़ रहा है तूल।

मेरठ. भाजपा सरकार में अब मदरसों का भी कायाकल्प हो रहा है। इसका उद्देश्य मदरसा के छात्रों को शिक्षा प्रणाली की मुख्यधारा में लाने के साथ ही उनकी उन्नति और शिक्षा के स्तर को उठाना है। इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। ये सरकार के बहुत उपयोगी निर्णय हैं लेकिन मदरसा के अधिकांश लोग इस बात से आशंकित हैं कि मदरसा के आधुनिकीकरण से उनका चरित्र बदल सकता है।


एनसीसी और स्काउट का शुरू हुआ प्रशिक्षण
2017 में, यूपी सरकार ने एसपीक्यूईम के अनुसार राज्य में मदरसों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया। इसने मदरसों की व्यवस्था में आधुनिकीकरण, पारदर्शिता लाने और उन्हें सरकार और लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें सबसे अच्छा और ठोस प्रयास जो सरकार की ओर से किया गया वह है मदरसा के छात्रों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने और वायु सेना और सेना जैसे रक्षा क्षेत्र के लिए योग्य बनाने के उद्देश्य से मदरसों में एनसीसी और स्काउट प्रशिक्षण शुरू करना।


मदरसा पाठयक्रम की समीक्षा किए बिना कम्प्यूटर शिक्षा शुरू
बता दें कि पहले मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति एक आंतरिक मामला था और यह मदरसा की प्रबंध समिति के माध्यम से किया जाता था। शिक्षकों की नियुक्ति में प्रबंध समिति के विवेकाधिकार के परिणामस्वरूप भाई-भतीजावाद के कारण अक्षम शिक्षकों का प्रवेश हुआ। कई मदरसों में सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए कंप्यूटर कंप्यूटर शिक्षकों की कमी और कंप्यूटर शिक्षा के लिए समिति की गैर-प्रतिबद्धता के कारण भी बेकार रहे।

एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य है कि यूपी सरकार ने मदरसा पाठ्यक्रम की समीक्षा केवल इस्लामिक पाठ्यक्रम में हस्तक्षेप किए बिना मदरसों में विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा शुरू करने के लिए की है। अंग्रेजी आधिकारिक भाषा होने के कारण छात्रों को नौकरी के बाजार में अधिक स्वीकार्यता का आश्वासन दिया जाएगा, जबकि हिंदी सीखना कुरान की नीति के अनुसार होगा जो बहुसंख्यकों की भाषा लिसान-ए-कौम सीखने की आवश्यकता पर बल देता है ताकि वे कर सकें गैर-मुसलमानों तक कुरान का संदेश पहुंचा सकते हैं और बहुसंख्यक समुदाय के साथ अपने दिन-प्रतिदिन के मामलों में बेहतर तरीके से संवाद कर सकते हैं। मुस्लिम बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने आधुनिक शिक्षा के महत्व को महसूस किया है। इसलिए आधुनिक इस्लामी स्कूलों की स्थापना की प्रवृत्ति अब गति पकड़ रही है।


बोले समाज के जिम्मेदार और अधिकारी
इस बारे में मेरठ जमियत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष और शहर काजी जैनुस्साजिददीन का कहना है कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र अब सेना और अन्य रक्षा क्षेत्र में नौकरी पा सकेंगे। यह एक अच्छी शुरूआत है। इसके लिए सरकार का वे तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। वहीं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मौलाना तारिक का कहना है कि अब मदरसों में रूढिवादी बेड़ियां टूट रही है और आधुनिकता की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार में मदरसों का शिक्षा स्तर सुधारने और उसके आधुनिकीकरण की ओर ध्यान दिया गया है।

BY: KP Tripathi

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