
Meerut Fake Police Chowki: उत्तर प्रदेश के मेरठ में ठगी और ब्लैकमेलिंग का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां कुछ शातिर बदमाशों ने बाकायदा एक फर्जी पुलिस चौकी खोल रखी थी। यह गैंग पहले लोगों को लड़कियों के जरिए अश्लील वीडियो कॉल कराकर हनी ट्रैप में फंसाता था और फिर दरोगा बनकर उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मोटी रकम वसूलता था। असली पुलिस ने जब इस फर्जी चौकी पर छापा मारा तो वहां का नजारा देखकर वह भी दंग रह गई। पुलिस ने मौके से गैंग के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दो अन्य की तलाश जारी है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब 29 जुलाई को नीरज नाम का एक युवक ब्रह्मपुरी थाने पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि टीपी नगर पुलिस चौकी के कुछ पुलिसवाले उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहे हैं। दरोगा और सिपाही उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर रुपयों की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने जब अपने रिकॉर्ड में जांच की तो टीपी नगर नाम की किसी पुलिस चौकी का कोई जिक्र नहीं मिला। इसके बाद ब्रह्मपुरी पुलिस ने मामले की गुप्त रूप से जांच शुरू कर दी।
शुक्रवार देर रात पुलिस ने बताए गए ठिकाने पर छापेमारी की। कमरे के अंदर का दृश्य देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। बदमाशों ने बिल्कुल असली पुलिस चौकी जैसा माहौल बना रखा था। कमरे में चौकी प्रभारी जैसी टेबल और कुर्सी रखी हुई थी। दीवार पर पीछे महात्मा गांधी और डॉ भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें भी लगी थीं, ताकि लोगों को शक न हो। छापेमारी के दौरान मौके से पुलिस की वर्दी, लैपटॉप, मोबाइल फोन और चौकी में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान भी बरामद हुआ। मौके पर मौजूद राहुल पाल और आकाश नाम के दो नकली पुलिसवालों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे साइबर ठगों की तर्ज पर काम करते थे। सबसे पहले वे एक लड़की के माध्यम से शिकार को वीडियो कॉल करते थे। कॉल के दौरान लड़की अश्लील बातें करती थी और इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर लिया जाता था। इसके बाद नकली पुलिसवाले बनकर आरोपी उस व्यक्ति को कॉल करते और वीडियो वायरल करने या झूठे केस में फंसाने की धमकी देते थे। डर के मारे जब पीड़ित उनकी फर्जी चौकी पर पहुंचता था तो वे उससे जमकर वसूली करते थे।
SP सिटी मेरठ विनायक गोपाल भोंसले ने बताया कि गिरफ्तार किए गए राहुल पाल और आकाश पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते थे। व्यापार में भारी नुकसान होने के बाद उन्होंने जल्दी पैसा कमाने के लिए हनी ट्रैप का यह खतरनाक तरीका अपनाया। जो व्यक्ति आसानी से उनके जाल में नहीं फंसता था उसे वे खुद को पुलिसकर्मी बताकर डराते थे। पुलिस ने इनके पास से लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। फरार दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और इनके बैंक खातों की भी गहनता से जांच की जाएगी।