Meerut Labourer Elephant Wedding : मेरठ के मजदूर अंकित ने पूरा किया बचपन का सपना! 20 साल की मेहनत की कमाई खर्च कर जयपुर से मंगाया हाथी और निकाली राजशाही बारात। जानें एक गन्ना काटने वाले की दिलचस्प कहानी।
मेरठ : कहानी है एक गन्ना काटने वाले मजदूर की। जिसने 5 साल की उम्र में ही यह सोच लिया था कि वह अपनी बारात हाथी पर सवार होकर लेकर जाएगा। 5 साल का बच्चा बड़ा हुआ शादी तय हुई। बारात के लिए तैयारियां हुई। लड़के की इच्छा के लिए घर वालों ने भी साथ दिया। आइए जानते हैं पूरा मामला…।
मेरठ के रहने वाले अंकित दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। अंकित ज्यादातर गन्ने की कटाई करते हैं, जिससे कि उन्हें 500 रुपए मजदूरी मिलती है। अंकित ने 12वीं पास कर रखी है। इसके बाद अंकित ने आईटीआई भी किया है। अंकित मजदूरी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं।
अंकित की मजदूरी से ही परिवार का खर्च चलता है। अंकित के पिता का नाम कालू है। उनके परिवार में कुल 6 बच्चे हैं। 4 बेटियां और 2 बेटे। अंकित अपने परिवार के साथ जमालपुर गांव में रहता है। उनका मकान कच्चा है। कई कमरों पर छत भी नहीं है। पूरा परिवार झोपड़ीनुमा घर में खुले में रहता है।
अंकित ने खुद बताया कि उन्होंने पहले बहनों और भाई की शादी की। भाई अंकित से छोटा है लेकिन, उसने लव मैरिज की है। भाई के तीन बच्चे हैं और वह अलग रहता है। अंकित का कहना है कि मैंने अपनी शादी का किसी के ऊपर दबाव नहीं डाला। मैंने खुद पैसा कमाया और बचत की इसके बाद अपनी शादी की।
अंकित ने आगे बताया कि यहां मेरठ के आसपास उसे अच्छा राजशाही हाथी नहीं मिला। अंकित का कहना है फिर मैंने लोगों से पता किया कि अच्छे हाथी कहां मिलते हैं। वहां सपर्क किया जाए। मुझे पता चला कि जयपुर में अच्छे राजशाही वाले हाथी हैं। फिर मैंने वहां से हाथी मंगवाया। हाथी को आने जाने से लेकर किराए तक कुल 2.60 लाख रुपए खर्च हुए।
हाथी को ट्रक से जयपुर से मेरठ लाया गया। यहां हाथी आने के बाद अंकित 21 अप्रैल को अपनी बारात ले जाने के लिए निकला। वह हाथी पर सवार हुआ और सबसे पहले गांव का चक्कर लगाया। इसके बाद हाथी को ट्रक से मुजफ्फरनगर के मंडौरा गांव ले जाया गया। गांव के बाहर अंकित दोबारा हाथी पर बैठा और बारात लेकर लड़की के घर पहुंचा। हाथी से बारात देखकर लोग काफी उत्साहित हुए।
अंकित के पिता ने बताया कि बेटे की बचपन की इच्छा थी कि वह हाथी से बारात लेकर जाए तो वह इच्छा हम लोगों ने मिलकर पूरी की। हम लोगों ने ठान लिया था कि बेटा दूल्हा बनकर हाथी पर ही जाएगा। इसके लिए मुझे चाहे कुछ भी क्यों न करना पड़े।