
मेरठ। अब्दुल्लापुर की बुजुर्ग मीतो छह महीने से दीपावली का इंतजार कर रही हैं। दीपावली पर पूरा परिवार घर में इकट्ठा होकर पूजा करते आए हैं। परिवार में दो बेटे आैर एक बेटी हैं। सबकी शादी हो चुकी है, बेटी ससुराल में है। पाेता-पोती-नाती-नातिन सब हैं परिवार में, दोनों बेटे अच्छा-खासा कमा भी रहे हैं। फिर भी न जाने क्यों मां मीतो को छह महीने पहले दोनों बेटे गंगानगर के श्री सार्इं सेवा संस्थान वृद्धजन आश्रम छोड़ गए। मीतोे को धनतेरस तक लगा कि बेटे उससे नाराज हैं, तो दीपावली पर उन्हें लेने जरूर आएंगे। पूरे परिवार के साथ दीपावली पूजन भी तो करना है। इसी इंतजार में मीतो पिछले दो दिन से ठीक से सो भी नहीं पा रही थी। दीपावली के दिन गुरुवार को भी सुबह से गेट पर किसी के आने की आहट के साथ मीतो सबसे पूछती हैं, कौन आया है, लेकिन मीतो को परिवार से लेने तो क्या, खैर खबर का फोन तक नहीं आया। दीपावली पर यहां सभी बुजुर्गों के लिए पकवान बनाया गया था, दोपहर तक इंतजार करने के बाद मीतो ने खाना खाने लगी।
बेटों को अब मां की जरूरत नहीं
'पत्रिका' ने जब उनके अपनों के आने के बारे में मीतो से पूछा, तो उनकी आंखें नम हो गर्इं। उन्होंने कहा कि अपने क्या, जहां खाना है वही घर है। बेटों को उनकी जरूरत नहीं है, अब यह ही (श्री सार्इं सेवा संस्थान संचालक) उनका परिवार है आैर कोर्इ नहीं। दीपावली पर मीतो से मिलने उनके घर से कोर्इ नहीं पहुंचा।
इनको भी रहा इंतजार
मीतो ही नहीं केवल वृद्धजन आश्रम में रह रही सरोज, प्रेमवती, गोमती समेत 15 बुजुर्गों को दीपावली पर अपनों का इंतजार था। रोशनी के त्योहार पर अपनी जिंदगी के अंधेरेपन को खत्म करने की आस भी थी, लेकिन यह आस पूरी नहीं हो सकी। गोमती का पोता जरूर अपनी दादी का हालचाल जानने पहुंचा था, लेकिन उसने अपने साथ एक बार भी अपनी दादी से चलने को नहीं कहा। हर किसी को अपने बेटे, बेटी, पोते व भार्इ से उम्मीद थी, लेकिन दीपावली पर भी जब इनके अपनों ने इन्हें थोड़ी सी भी खुशी नहीं दी, तो ये आैर दुखी हो गए।
इन्होंने दी खुशी
एसएसपी मंजिल सैनी समेत कुछ लोग दीपावली पर जरूर गंगानगर के वृद्धाश्रम पहुंचे आैर इन्हें गिफ्ट दिए, तो इन्हें थोड़ी खुशी मिली। एसएसपी ने इनके हालचाल पूछे आैर कंबल-फल आदि भी दिए। संस्थान की नम्रता शर्मा ने कहा कि दीपावली पर इन्हें अपने घर की याद तो आई, लेकिन कुछ नहीं बोले, बस चुपचाप ही रहे।