
मेरठ। मानदेय बढ़ाए जाने की मांग को लेकर गुरुवार को कमिश्नरी पार्क में मिड डे मील कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि जब तक मानदेय नहीं बढ़ाया जाएगा, वे मिड डे मील नही बनाएंगी। आपको बता दें कि मिड डे मील कर्मचारी, जो सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाती हैं उन्हें केंद्र सरकार 2009 से केवल 1000 रुपये मानदेय देती है। वह भी साल में 10 महीने। छुट्टी के महीनों का मानदेय भी काट लिया जाता है।
इन कर्मचारियों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार अपने अंतिम बजट में उनके मानदेय में कुछ बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी के विरोध में गुरुवार को विरोध किया गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मिड डे मील कर्मचारी लंबे समय से न्यूनतम वेतन, मानदेय में बढ़ोतरी, सामाजिक सुरक्षा गारंटी व मिड डे मील योजना को मजबूत बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन भाजपा सरकार मिड डे मील कर्मचारियों को लगातार नजरअंदाज करती रही है।
वक्ताओं ने कहा कि बजट के नाम पर सरकार ने स्कीम वर्कर्स के साथ मजाक किया है। इस बार के बजट में उनके लिए कोई जगह नहीं है। जबकि देश भर में रसोइया कर्मियों का आंदोलन चल रहा है कि उनको सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले तथा 18 हजार न्यूनतम वेतन मिले।