
मेरठ-हापुड़ लोकसभा के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने आज लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत मेरठ बफेल फायरिंग रेंज बनाने की मांग उठाई। सेन्य इलाके में फायरिंग बट्स के स्थान पर दो और बफल रेंज बनाए जाने का मांग काफी समय से प्रस्तावित है।
आजादी के समय से हैं नौ बट्स
मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि आज़ादी के समय से मेरठ छावनी स्थित फायरिंग रेंज में A से लेकर I तक कुल नौ बट्स थे। जिनमें बाद में छह बट्स बंद हो गए -A, B, C, D, H तथा I, अब सिर्फ 3 बट्स काम कर रहे हैं।
तीन किलोमीटर तक जाती हैं गोलियां
सांसद ने लोकसभा में बताया कि खुले तीन बट्स में खुले आकाश के नीचे मिट्टी के टीले बनाकर फायरिंग की जाती है। जिनसे चलने वाली गोलियाँ लगभग तीन से साढ़े तीन किलोमीटर तक निकल जाती हैं। इसकी वजह से आसपास के गांव सोफीपुर, मामेपुर, ललसाना, उल्देपुर तथा पल्हेड़ा के ग्रामीणों और पशुओं की सुरक्षा खतरे में रहती है।
बफेल रेंज के तहत होती है सुरक्षित फायरिंग
बफल रेंज के तहत बनाई जाने वाली विशेष तरह की फायरिंग रेंज चहारदीवारी के अन्दर होती है तथा इसमें ऊपर से नीचे की ओर फायरिंग की जाती है। इस रेंज में चलने वाली गोलियों के छिटकने या आम जनता के घायल होने की आशंका नहीं होती है।
मेरठ में उपलब्ध बफेल फायरिंग रेंज के लिए जगह
मेरठ छावनी में ऐसी रेंज के लिए पर्याप्त 3.5 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र उपलब्ध है। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने लगभग 3 वर्ष पूर्व उपरोक्त प्रकार की एक बफल रेंज बनाए जाने के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सभापति के माध्यम से सरकार से अनुरोध किया कि मेरठ में वर्तमान में काम कर रहीं बट्स के स्थान पर दो और बफल रेंज बना दी जाएँ। इससे मेरठ की फायरिंग रेंज डेंजर जोन में चिन्हित होने के दायरे से बाहर हो जाएगी।