मेरठ

एक हजार साल पुरानी इस मस्जिद में महमूद गजनवी ने पढ़ी थी जुमे की नमाज

पूरी मस्जिद मिट्टी आैर चूने से निर्मित, समुदाय के लोगों के चंदे से होता है रखरखाव  
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May 17, 2018
meerut

केपी त्रिपाठी, मेरठ। मेरठ की जामा मस्जिद अपने आप में इतिहास समेटे हुए हैं। करीब एक हजार साल पुरानी इस मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि इसके जैसी पूरे विश्व में सिर्फ तीन ही मस्जिद हैं। पहली मेरठ में, दूसरी उत्तर प्रदेश के ही बदायूं में और तीसरी भारत से बाहर दूसरे मुल्क यानि श्रीलंका में। हजारों साल का इतिहास समेटे इस मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यहां पर मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मस्जिद के केयर टेकर शाह अब्बास के अनुसार इसकी बुनियाद 570 हिजरी ईस्वी में रखी गई थी।

एक हजार साल से पढ़ी जा रही जुमे की नमाज

मस्जिद के मुतवल्ली ने बताया कि जिस समय मुल्क में महमूद गजनवी ने आक्रामण किया था। उस समय वह लाहौर की तरफ से भारत में घुसा और सारे शहरों को रौंदता हुआ दिल्ली जा रहा था तब वह इस मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए रुका था। बताया जाता है कि उस दिन जुमा था और उसके साथ करीब पचास हजार लोगों ने इस मस्जिद में एक साथ नमाज पढ़ी थी। तभी से मेरठ की इस जामा मस्जिद में हर जुमे को नमाज अदा की जाती है।

मिट्टी की बनी है मस्जिद

एक हजार साल पुरानी इस मस्जिद के निर्माण में अधिकांश मिट्टी का प्रयोग किया गया है। मिट्टी के साथ ही इसमें चूने का प्रयोग भी हुआ है।

मस्जिद में है चारों तरफ हैं नुकीले दरवाजे

इस मस्जिद के चारों तरफ दरवाजे है। इस दरवाजों की खासियत हैं कि यह दरवाजे नुकीले हैं। बताया जाता है कि मुगल सल्तनत के दौरान हुमायूं ने सभी धार्मिक स्थलाें की रक्षा के लिए उनके मुख्य द्वारों पर लगे दरवाजे पर लोहे के नुकीली मोटी कील लगवाई थी। यह सुरक्षा के लिए थी। उस दौरान हमले आदि होने पर दरवाजे आदि तोड़ने के लिए हाथियों का प्रयोग किया जाता था। हाथी अपने मस्तक के प्रहार से दरवाजों को तोड़ देता था। इस मस्जिद को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं।

नहीं लेते सरकारी इमदाद खुद करते हैं देखभाल

मस्जिद के केयरटेकर शाह के अनुसार इसके मेंटिनेंस के लिए कोई सरकारी इमदाद आदि नहीं ली जाती। इसकी देखभाल और इसका मेंटिनेंस खुद समुदाय के लोग मिलकर करते हैं।

Published on:
17 May 2018 06:27 pm