पद्मश्री पूर्व धाविका पीटी उषा ने युवा पीढ़ी को दिए टिप्स
मेरठ। पद्मश्री उड़नपरी पीटी उषा ने कहा है कि देश में कर्इ उड़नपरी हैं, लेकिन उन्हें तराशने के लिए जो सिस्टम होना चाहिए, उस पर काम नहीं हो रहा है, यदि उस पर काम हो जाए तो दुनिया में भारतीय एथलीट अपना परचम फहराएंगे। उड़नपरी पीटी उषा मेरठ के बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल में गर्ल्स एंपावरमेंट कार्यक्रम में हिस्सा लेने आयी थी। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि मोबाइल फोन पर वीडियो गेम्स छोड़कर मैदान में उतरें तो वे देश का नाम रोशन कर सकेंगी।
देश में टेलेंट की कमी नहीं
उड़नपरी पीटी उषा ने कहा कि देश में टेलेंट की कमी नहीं है। बस जरूरत है ग्रास रूट पर 14 साल से कम आयु के बच्चों तक सुविधाएं पहुंचाने की, तभी वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि देश का गोल्डन टेलेंट गांवों में है। हमें गांवों में पहुंचकर टेलेंट को तलाश करके निखारने की जरूरत है। उनके लिए फ्री बेहतरीन ट्रेनिंग पर ध्यान देना होगा। कम से कम तीन साल तक ट्रेनिंग देने के बाद परिणाम निश्चित तौर पर बेहतर मिलेंगे। तब हमारे ये खिलाड़ी आेलंपिक में पदक ला सकेंगे।
वीडियो गेम्स छोड़कर मैदान में उतरे
उड़नपरी पीटी उषा ने कहा कि युवा पीढ़ी आजकल मोबाइल फोन पर वीडियो गेम्स खेलने में अपना समय जाया कर रही हैं, जबकि उन्हें ज्यादा वक्त मैदान में बिताने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 13 से 23 साल की उम्र एथलीट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि अपनी एकेडमी में वह 20 युवा बालिकाआें को निशुल्क ट्रेनिंग दे रही हैं, इसमें दुती चंद ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने युवा पीढ़ी को ज्यादा से ज्यादा समय मैदान में प्रैक्टिस पर ध्यान देने की बात कही।