Highlights स्टेशनों और ट्रेनों के कोच में मिलेगा नए लुक में रेल नीर भगवा रंग और बायोडिग्रेडेबल होगी रेल नीर की बोतलें हापुड़ के प्लांट में बनेंगी नए लुक की पानी की बोतलें
मेरठ। प्लास्टिक और पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने के बाद इंडियन रेलवे रेल नीर की बोतल को भी नया रूप देने जा रही है। जब आप रेल के कोच में सफर कर रहे होंगे या स्टेशन पर पानी के लिए बोतल खरीदेंगे तो कुछ दिनों बाद ये बोतल आपके हाथ में नए लुक में दिखाई देगी। भगवा रंग में रंगे इस बोतल का रेपर का लुक तो नया होगा ही साथ ही यह बायोडिग्रेडेबल भी होगी। यह बोतल इस्तेमाल होने के बाद खुद-ब-खुद ही नष्ट हो जाएगी। यह बोतल पर्यावरण को दूषित करने वाली आम प्लास्टिक बोतलों की तरह नहीं होगी। प्लास्टिक कचरे की जगह पर्यावरण मित्र के रूप में सामने आने वाली इन बोतलों को देश भर के स्टेशनों में नए साल से लागू किया जाएगा। इसी साल गांधी जयंती पर आइआरसीटीसी ने प्लास्टिक बोतलों की जगह बायोडिग्रेडेबल बोतलों को शुरू करने की घोषणा अपने ट्विटर अकाउंट पर की थी।
भारतीय रेलवे कैटरिंग टूरिज्म कार्पोरेशन यानी आइआरसीटीसी के पूरे देश भर में अभी 10 प्लांट हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 11 लाख लीटर पानी की सप्लाई होती है। फिलहाल अभी स्टेशनों और ट्रेनों में मिलने वाली रेल नीर की बोतलें प्लास्टिक की होती हैं। रेलवे ने अब बायोडिग्रेडेबल बोतलें अपने मुंबई प्लांट और हापुड़ प्लांट बनाने की शुरूआत कर दी है। शीघ्र ही ये मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, बरेली, मुरादाबाद समेत महत्वपूर्ण स्टेशनों पर लागू किया जाएगा। यानी पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल बोतलें लागू होने के बाद पर्यावरण में करीब 11 लाख प्लास्टिक की बोतल कम होंगी। हापुड़ प्लांट से रोजाना 22 हजार पेटी रेल नीर की सप्लाई होती है। इसमें मेरठ के अलावा, बरेली, कानपुर, गाजियाबाद, शाहजहांपुर के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2021 तक चार अन्य प्लांट शुरू करने की योजना है। जिसकी अनुमति भी मिल चुकी है।
दिल्ली से लखनऊ के बीच चलने वाली देश की पहली प्राइवेट ट्रेन यानी तेजस एक्सप्रेस में बायोडिग्रेडेबल बोतलों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा चुका है। प्रयोग सफल रहा है। अब बायोडिग्रेडेबल बोतलों को व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा। आइआरसीटीसी (हापुड़ प्लांट) के ऑपरेशन हेड विनीत कुमार ने बताया कि प्लांट पर बायोडिग्रेडेबल बोतलों में रेल नीर की पैकेजिंग शुरू की जा चुकी है, लेकिन जो बचा हुआ स्टाक है उसको खत्म करके ही इन बोतलों की सप्लाई स्टेशनों में की जाएगी।