चारों तरफ काला धुआं, धधकती आग की लपटें और तीसरी मंजिल की खिड़की से आती मासूम बच्चों की वो आखिरी चीखें… जिन्होंने किदवाई नगर के हर शख्स के कलेजे को छलनी कर दिया। एक मां अपनी 6 महीने की जुड़वा बच्चियों को कलेले से चिपकए मौत से लड़ रही थी। बाहर खड़े पड़ोसी बेबस थे।
“बचाओ… कोई मदद करो… हमें बाहर निकालो…” दूसरी मंजिल की खिड़की से आ रही ये चीखें सुनकर पूरा मोहल्ला सहम गया। आग की तेज लपटों और धुएं के गुबार के बीच रुखसाना अपने बच्चों को सीने से लगाए जिंदगी की भीख मांग रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद रुखसाना बच्चों को लेकर दूसरी मंजिल के कमरे में पहुंच गई थीं, इस उम्मीद में कि शायद वहां वे सुरक्षित रह सकें। लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें दूसरी मंजिल तक पहुंच गईं।
खिड़की खोलकर रुखसाना और बच्चे मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे। उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। किसी ने पानी की बाल्टियां उठाईं, तो किसी ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की। मगर आग इतनी भीषण थी कि कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। देखते ही देखते मकान की तीनों मंजिलें आग की लपटों में घिर गईं। धुएं का गुबार आसमान तक छा गया। जब तक दमकलकर्मी और पुलिस मौके पर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। झुलसने और दम घुटने से इकबाल के बेटे आसिम की पत्नी रुखसार, उनका तीन साल का बेटा अकदस, 6 माह की जुड़वां बेटियां नबिया व इनायत और बेटे फारूक की बेटी महविश व बेटे हम्माद की मौत हो गई।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि आग ने कुछ ही देर में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया था। लोगों ने भरसक प्रयास किया, लेकिन भीषण आग के कारण किसी को बचाया नहीं जा सका।
मेरठ के किदवई नगर के इस्लामाबाद स्थित गली नंबर-3 में कपड़ा कारोबारी इकबाल अहमद का तीन मंजिला मकान है। इसमें उनके तीनों बेटे आसिम, फारूक और डॉ. अरशद अपने परिवार के साथ रहते हैं। ग्राउंड फ्लोर पर ‘आई संस एम्ब्रॉयडरी’ नाम से कारखाना चलता है। इसमें पावरलूम मशीनों से धागों के जरिए कपड़ा तैयार किया जाता है। वहीं पहली और दूसरी मंजिल पर परिवार रहता है।
घटना के समय दूसरी मंजिल पर इकबाल की पत्नी अमीर बानो, आसिम की पत्नी रुखसार, उनका तीन वर्षीय बेटा अकदस, छह माह की जुड़वां बेटियां नबिया और इनायत, फारूक की 12 वर्षीय बेटी महविश, चार वर्षीय बेटा हम्माद समेत अन्य परिजन मौजूद थे। रात करीब पौने नौ बजे अचानक मकान में आग लग गई। घर के भीतर अलग-अलग जगहों पर कपड़े का स्टॉक रखा था, जिससे आग तेजी से फैल गई। कुछ ही देर में लपटों ने विकराल रूप ले लिया और पूरा मकान धुएं से भर गया। हालात बिगड़ते देख पड़ोसियों ने पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी।
जब आग ने विकराल रूप धारण किया और मकान में धुआं भरने लगा तो परिवार के सदस्य जान बचाने के लिए ऊपर की ओर भागे। इस दौरान डॉ. अरशद और फारुख की पत्नी शहरीश, अरहम व रिहान को लेकर छत के रास्ते पड़ोसियों के घर चले गए। लेकिन रुखसाना व अन्य बच्चे कमरे जाकर फंस गए। कुछ ही देर में आग वहां तक पहुंच गई। रुखसाना और बच्चे खिड़की खोलकर जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते रहे। आसपास के लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन भीषण आग के कारण कोई भी मकान के अंदर नहीं जा सका। जब तक दमकलकर्मी और पुलिस कर्मी पहुंचे उनकी जान जा चुकी थी। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि आग ने कुछ ही देर में मकान के तीनों मंजिल को आगोश में ले लिया था। महिला और बच्चों की चीख पुकार सुनकर लोगों ने पानी डालने व उन तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडेय, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू की। पुलिस और दमकलकर्मियों ने परिवार के लोगों को पास स्थित राजधानी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर ने पांच बच्चों सहित छह लोगों को मृत घोषित कर दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है। संकरी गलियों के कारण दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने और बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।इस दर्दनाक हादसे में कुल छह लोगों की मौत हो गई। मृतकों में रुखसार (30) पत्नी आसिम, अकदस (3) पुत्र आसिम, छह माह की जुड़वां बेटियां नबिया और इनायत, महविश (12) पुत्री फारूक और हम्माद (4) पुत्र फारूक शामिल हैं। वहीं, इकबाल की पत्नी अमीर बानो गंभीर रूप से झुलस गई हैं और उनका उपचार चल रहा है।
छह माह पहले ही रुखसार ने जुड़वां बेटियों नबिया और इनायत को जन्म दिया था। हादसे की रात वह दूसरी मंजिल के कमरे में दोनों मासूमों को सीने से लगाए बैठी थी। पास ही उसका तीन वर्षीय बेटा अकदस भी था।