चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ उत्तर पुस्तिका बदलने के खेल में एसटीएफ भेज रही शासन को रिपोर्ट
मेरठ।चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में हुए उत्तर पुस्तिका बदलने के खेल के खुलासे के बाद माना जा रहा है कि यह उप्र का व्यापम घोटाला है। जिसके तार सफेदपोश लोगों के साथ ही चाैधरी चरण सिंह विवि में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े हुए हैं। हैरानी की बात है कि घोटाले का पर्दाफाश हुए करीब चार दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक न तो एसटीएफ ने और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई बड़ी मछली को गिरफ्तार किया है। सूत्रों की मानें तो जिस उत्तर पुस्तिका सेक्शन में कापियां रखी जाती थी, उसकी चाबी सिर्फ दो लोगों के पास होती थी, लेकिन इसके बाद भी उसकी कई डुप्लीकेट चाबियां बनी हुई थी। जिससे मौका पड़ने पर कोई भी उस सेक्शन को खोल लेता था। यह सब हो रहा था वीसी कार्यालय के नीचे। गौरतलब है कि जिस व्हाइट बिल्डिंग से कापियां निकाली जाती थी, उस बिल्डिंग के ऊपर ही वीसी का कार्यालय भी है। हैरानी की बात है कि इसकी भनक कभी वीसी को भी नहीं लगी।
एसटीएफ ने भेजी गोपनीय रिपोर्ट
अब तक की हुई जांच में एसटीएफ ने शासन को गुप्त रिपोर्ट भेजी है। शासन को भेजी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय मेरठ के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक भेजी गई रिपोर्ट में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पांच अधिकारियों के नाम शामिल हैं। एसटीएफ का मानना है कि कापियों के बदलने की जानकारी इन अधिकारियों को काफी पहले से थी। इन अधिकारियों के संरक्षण में यह सब काम चल रहा था।
एसटीएफ पर डाला जा रहा दबाव
एसटीएफ जिस पेपर आउट मामले में काम कर रही थी उससे खुद जांच भटक गई और एसटीएफ के हाथ नया स्कैंडल लग गया परीक्षा में उत्तर पुस्तिका बदलने का। जबकि पेपर आउट मामला काफी बड़ा था और उसमें भी कई सफेदपोश के शामिल होने की बात सामने आई थी, लेकिन उत्तर पुस्तिका बदलने के मामले में फंसे विवि के अधिकारी अब सत्ताधारी विधायक के जरिए अपने पूर्व के संबंधों का हवाला देकर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
मामले की गूंज राजभवन तक
चौधरी चरण सिंह विवि में उत्तर पुस्तिका बदले जाने की गूंज लखनऊ राजभवन तक सुनाई दे रही है। मामले में राजभवन ने भी संज्ञान लिया और वीसी से इसकी रिपोर्ट तलब की है। वीसी प्रो. एनके तनेजा अपने स्तर से रिपोर्ट तैयार कर राजभवन भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
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