मेरठ

फूट-फूट कर रोए डिप्टी सीएम, कहां- जब लखनऊ आया तो पहनने के लिए चप्पल तक…मैं गरीबी का दर्द समझता हूं,

मेरठ के कवि सम्मेलन में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अपने संघर्ष के दिनों को याद कर भावुक हो गए। गरीबी, ठंड और बिना जूते के दिन याद करते हुए मंच पर रो पड़े। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

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Jan 23, 2026
मंच पर भावुक हुए में डिप्टी सीएम बृजेश पाठक फोटो सोर्स वायरल वीडियो

मेरठ में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भावुक हो गए। मंच से अपने संघर्ष और गरीबी भरे शुरुआती जीवन को याद करते हुए उनकी आंखें भर आईं। उनका यह भावुक पल सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर मेरठ में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मंच से संबोधन के दौरान वह अपने बीते दिनों को याद कर भावुक हो गए। कई बार बोलते-बोलते रो पड़े।

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जब लखनऊ आए, तब पैर में चप्पल तक नहीं थे

ब्रजेश पाठक ने बताया कि जब वह पहली बार लखनऊ आए थे। तब उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। कड़ाके की ठंड में उनके पास पहनने के लिए जूते तक नहीं थे। गर्मी में चप्पल और सर्दी में जूते का इंतजाम कर पाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा और जिया है, इसलिए आज भी जब सड़क पर किसी गरीब को दुखी देखता हूं, तो मन व्यथित हो जाता है। डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि वह खुद को किसी बड़े पद पर बैठा व्यक्ति नहीं, बल्कि गरीबों की सेवा करने वाला इंसान मानते हैं। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें खाना बनाना भी नहीं आता था। आटा गूंथते समय कभी आटा ज्यादा हो जाता था। तो कभी पानी। कई बार जरूरत से ज्यादा आटा बन जाता था। जबकि खाने वाला केवल एक ही व्यक्ति होता था।

मां ने मिट्टी के तेल वाला दिया था स्टोव

उन्होंने बताया कि उनकी मां ने उन्हें मिट्टी के तेल वाला एक स्टोव दिया था। जिस पर लखनऊ में रहते हुए वह अपनी रोटियां पकाते थे। इन अनुभवों ने उन्हें जीवन की सच्चाई सिखाई। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि जीवन में हालात बदलते रहते हैं, लेकिन देश और तिरंगे के सम्मान के लिए किया गया योगदान हमेशा याद रखा जाता है।

Published on:
23 Jan 2026 09:14 am
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