Hot Air Balloon: पश्चिमी यूपी में पर्यटन को बढावा देने के लिए अब कई तरह की तैयारियां पूरी हो चुकी है। पहले हस्तिनापुर को पर्यटन स्थल के रूप में पूरी तरह से सवारने का प्लान सरकार ने बताया और अब हस्तिनापुर से सटे बिजनौर में हॉट एयर बैलून से रोमांचक यात्रा का लोगों को लुत्फ दिलाने के लिए हरी झंडी मिल गई है।
Hot Air Balloon: गंगा के ऊपर हॉट एयर बैलून पर सफर और ऊपर नीला आकाश, जी हां। ये सोचकर ही काफी रोमांच लगने लगता है। लेकिन पश्चिमी यूपी के लोगों का यह सपना अब पूरा होने जा रहा है। बिजनौर की सीमा पर गंगा बैराज से लोग हॉट एयर बैलून का मजा ले सकेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो इसका दायरा हस्तिनापुर तक बढ़ाया जा सकता है। यानी हस्तिनापुर से गंगा के ऊपर हॉट एयर बैलून में बैठकर लोग यात्रा का मजा ले सकेंगे। रोमांच का यह सफल अगले साल से जल्द से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने पूरी प्लानिंग कर ली है। विभाग ने इसके लिए हॉट एयर बैलून सेवा देने वाली कंपनी के अधिकारियों ने क्षेत्र का सर्वे कर वैलून को उड़ाने की हरी झंडी दे दी है।
हॉट एयर बैलून से हवाई यात्रा का पीडब्ल्यूडी प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। जिसमें बिजनौर गंगा बैराज से विदुरकुटी से हॉट एयर बैलून से हवाई यात्रा की जा सकेगी। पहले चरण में एक कंपनी के अधिकारी इस क्षेत्र को इस ऐडवेंचर के लिए उपयुक्त बता चुके हैं। इस रोमांचक यात्रा के लिए पर्यटकों को करीब 10 हजार रुपये खर्च करने होंगे, जबकि गंगा बैराज के आसपास हॉट एयर बैलून से उड़ान भरने के लिए 500 रुपये खर्च करने होंगे। हॉट एयर बैलून कंपनी के अधिकारियों ने इस खर्च का आकलन पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से साझा किया है। इसके बाद अगर हॉट एयर बैलून यात्रा में लोगों ने रूवि दिखाई तो इसके बाद यह हस्तिनापुर तक शुरू की जा सकती है।
दरअसल, प्रकृति प्रेमियों के लिए हस्तिनापुर के गंगा का किनारे से लेकर बिजनौर तक का इलाका महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में उभर रहा है। प्राकृतिक नजारों और पक्षियों से प्रेम करने वालों के लिए यह इलाका किसी रोमांच से कम नहीं है। यह पूरा इलाका प्राकृतिक नजारों की भरमार तो है ही, साथ ही सैकड़ों प्रकार के प्रवासी पक्षी भी हैं। इस क्षेत्र में ब्लैक नेक्ड स्टोर्क, पेंटेड स्टोर्क, ग्रे बिलिड कुकू, हनी बजर्ड, ग्रे हॉर्नबिल, जकाना, ओपनबिल स्टोर्क, कॉटन पिजम, हेरोन आदि प्रजाति के पक्षी दिखते हैं। मुख्य रूप से ये पक्षी मंगोलिया, साइबेरिया, नार्वे सहित पूरे यूरोपियन देशों से आते हैं। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह तक काफी संख्या में प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं और यह जनवरी तक यहां पर विचरण करते हैं।
BY: KP Tripathi