मेरठ

चलती-फिरती फैक्ट्री से ऑन डिमांड बनाते थे हथियार, पुलिस की छापेमारी के बाद हर कोई रह गया सन्न, देखें वीडियो

Highlights जहां मिलती थी सुनसान जगह, वहीं खोल ली जाती थी मौत की फैक्ट्री पुलिस को कई बार चकमा देकर फैक्ट्री लेकर फरार हो चुके थे कारीगर जमानत पर छूटने के बाद फिर से बनाने लगे थे मौत का सामान

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Nov 14, 2019
meerut

मेरठ। पुलिस ने एक ऐसी तमंचा फैक्ट्री पकड़ी है, जो मोबाइल थी, मतलब चलती-फिरती तमंचा फैक्ट्री। जिसका कोई स्थानी ठिकाना नहीं था। इस तमंचा फैक्ट्री के कारीगर मौत का समान बनाने की पूरी मशीन अपने साथ गाड़ी में लेकर चलते थे। जहां भी इनको जंगल में कोई खाली जगह या खंडहर देखते थे। वहीं पर अपना डेरा डालकर काम शुरू कर देते थे।

इंचौली के तोफापुर बिजलीघर के समीप खंडहर में चल रही चलती-फिरती तमंचा फैक्ट्री का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मौके से चार आरोपितों सहित बड़ी संख्या में अवैध हथियार बरामद किए गए। जमानत पर छूटने के बाद आरोपितों ने दोबारा से तमंचा फैक्ट्री का संचालन शुरू कर दिया था। जो जोन के सभी जनपदों में तमंचा और बंदूक की सप्लाई दे रहे थे। पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि इंचौली पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने संयुक्त रूप से इंचौली के तोफापुर स्थित बिजलीघर के समीप पड़े खंडहर में छापा मारा, जहां पर हथियार बनाने की फैक्ट्री चल रही थी। पुलिस ने मुख्य अभियुक्त अलीमुद्दीन, साबिर, हारुन और शहजाद को पकड़ लिया। अलीमुद्दीन और साबिर हाल ही में जेल से छूटकर आए थे।

आरोप है कि दोनों आरोपितों ने जेल से छूटते ही दोबारा से तमंचा फैक्ट्री की शुरूआत कर दी। हाल में चारों आरोपित स्थान बदल-बदलकर तमंचा और बंदूक बना रहे थे। एसएसपी ने बताया कि फैक्ट्री के अंदर से बड़ी संख्या में देशी तमंचे और बंदूक व तमंचे बनाने की मशीन तथा उपकरण एवं सामान बरामद किया। आरोपितों ने बताया कि हाल ही में हत्या की दो घटनाओं में उनके तमंचे का प्रयोग भी किया गया। टीपीनगर और मेडिकल थाना क्षेत्र में हुई हत्या में हमलावरों ने उक्त लोगों से तमंचे खरीदे थे। आरोपितों को पुलिस ने बताया कि कई सप्लायर उनके संपर्क में है। पुलिस उक्त सप्लायरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि पकड़े गए चारों आरोपितों से पूछताछ की गई। जिसमें उन्होंने सहारनपुर, हापुड़, बुलंदशहर, शामली और मुजफ्फरनगर में भी तमंचों की सप्लाई करना स्वीकार किया है। एक तमंचे को तीन हजार तथा बंदूक को पांच हजार में बेचा जा रहा था। ऑन डिमांड भी हथियार तैयार करते थे और बताए स्थान पर डिलीवरी में दे रहे थे।

Published on:
14 Nov 2019 01:03 pm