डीजीपी आेपी सिंह ने नर्इ व्यवस्था में कर्इ जिम्मेदारी दी पुलिस अफसरों को
मेरठ। उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराध भाजपा सरकार और सूबे की पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे। अपराध पर नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार और पुलिस मुखिया द्वारा नए प्रयोग किए जाते रहे हैं। इन्हीं प्रयोगों में डीजीपी ओपी सिंह द्वारा जारी निर्देश में किया गया था, जो 13 जून 2018 को जारी किया गया था। जिसमें परिपत्र संख्या-डीजी 30/2018 द्वारा प्रदेश के थानों में प्रभारी निरीक्षक के अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक प्रशासन, प्रभारी निरीक्षक अपराध और प्रभारी निरीक्षक कानून-व्यवस्था के पद पर अतिरिक्त निरीक्षकों की तैनाती के संबंध में था। जिसके तहत थानों में थाना प्रभारी के अलावा तीन अतिरिक्त इंस्पेक्टरों की तैनाती की गई थी। इस प्रयोग के पीछे तर्क था कि इससे प्रदेश और थाना क्षेत्रों में बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगने के साथ ही थाना प्रभारी का बोझ भी कम होगा, लेकिन ये नई व्यवस्था छह महीने भी ठीक से नहीं चल पाई और चार माह में ही धराशाही हो गई। खुद डीजीपी ओपी सिंह ने बीती 3 अक्टूबर 2018 को अपने इस आदेश को पलट दिया। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि थानों में इस नए प्रयोग से प्रदेश के समस्त जोन से प्राप्त फीडबैक में इसको लागू करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
अब लागू हुई ये नई व्यवस्था
अब उपरोक्त व्यवस्था को खत्म कर नई व्यवस्था के तहत थानों पर प्रभारी निरीक्षक यानी थानाध्यक्ष के अलावा मात्र एक अन्य निरीक्षक की तैनाती की जाएगी। थाने में तैनात होने वाले इस अतिरिक्त निरीक्षक का काम अपराध नियंत्रण करना होगा। इन्हें निरीक्षक अपराध के नाम से सम्बोधन किया जाएगा। यह भी विभागीय शर्त रखी गई है कि निरीक्षक अपराध थाने में तैनात प्रभारी निरीक्षक से वरिष्ठ नहीं होगा।
अपराध निरीक्षक के कार्य
थाने में तैनात होने वाले अपराध निरीक्षकों के कार्य की सीमा भी विभागीय स्तर पर ऊपर से तय की गई है। जिसके अनुसार थाना क्षेत्र में घटित गंभीर व महत्वपूर्ण अपराधों की विवेचना निरीक्षक अपराध करेंगे। अपराधों की रोकथाम के लिए निरोधात्मक कार्रवाई भी ये ही करेंगे। किसी अपराध के घटित होने की सूचना पर अविलम्ब विवेचनात्मक कार्रवार्इ, घटनास्थल का निरीक्षण, घटनास्थल का सुरक्षित करना, लाश का पंचनामा भरने से लेकर पोस्टमार्टम भेजने और एफएसएल आदि की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी अपराध निरीक्षक के जिम्मे होगी। इसके अतिरिक्त न्यायालय से प्राप्त होने वाले सम्मन वारंट व अन्य वारंट तामील तथा कोर्ट में गवाहों की उपस्थिति भी इन्हीं को सुनिश्चित करनी होगी।