चीनी कंपनी को कानपुर-मुगलसराय गलियारे ( Kanpur-Mughalsarai Corridor ) के 417 किलोमीटर के खंड का ठेका मिला था। Railway ने चीनी कंपनी के काम की धीमी गति को ठेका रद्द करने का आधारं बनाया। Uttar Pradesh Government चीनी कंपनी से कानपुर मेट्रो के प्रोजेक्ट का ठेका इससे पहले वापस ले चुकी है
नई दिल्ली। भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा ( LAC ) के गलवान घाटी ( Galwan Valley ) में हिंसक झड़प के बाद भारत ने चीन को कई झटके दिए हैं। अब भारतीय रेलवे ने पूर्वी डेडिकेटेड मालवाहक गलियारे ( Eastern Dedicated Freight Corridor ) के सिग्नल एवं दूरसंचार कार्य ( Signal and Telecom Work ) के लिए एक चीनी कंपनी को दिया गया ठेका रद्द कर दिया है। काम की धीमी गति को आधार बनाकर ठेका रद्द करने का फैसला रेलवे ने लिया है।
चीनी कंपनी को इस काम का ठेका कानपुर और मुगलसराय के बीच गलियारे ( Kanpur-Mughalsarai Corridor ) के 417 किलोमीटर लंबे खंड पर करने के लिए मिला था।
14 दिन का नोटिस देने के बाद लेटर जारी
इस बारे में डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ( DFCCIL ) के प्रबंध निदेशक अनुराग सचान ने बताया कि चीनी कंपनी को ठेका रद्द करने को लेकर शुक्रवार को लेटर जारी किया गया है।
सचान ने कहा कि बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एडं डिजाइन इंस्टिट्यूट ऑफ सिग्नल ऐंड कम्युनिकेशन ग्रुप ( Beijing National Railway Research and Design Institute of Signal and Communication Group ) को 14 दिन का नोटिस देने के बाद यह निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया।
2019 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
बीजिंग नैशनल रेलवे रिसर्च एडं डिजाइन इंस्टिट्यूट ऑफ सिग्नल ऐंड कम्युनिकेशन ग्रुप 2016 में सिग्नल एवं दूरसंचार कार्य के लिए 471 करोड़ रूपए का ठेका दिया था। अधिकारियों ने कहा कि चीनी कंपनी को इस परियोजना से बाहर निकालने का काम जनवरी, 2019 में शुरू हुआ था क्योंकि वह निर्धारित समय सीमा में काम नहीं कर पाई थी।
सचान ने कहा कि कंपनी तब तक महज 20 फीसद ही काम कर पाई थी। डीएफसीसीआईएल ( DFCCIL ) ने इस साल अप्रैल में विश्व बैंक ( World Bank ) को यह ठेका रद्द करने के अपने फैसले से अवगत कराया था। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए वित्तपोषण कर रहा है।
काम की धीमी गति
डीएफसीसीआईएल एमडी सचान ने कहा कि काम की धीमी गति के चलते हमने चीनी कंपनी को दिया गया ठेका रद्द किया है। कंपनी के काम की धीमी गति से हमारे कार्य में बहुत देरी हो गई। हमें अब तक विश्व बैंक से एनओसी ( NOC ) नहीं मिला है लेकिन हमने उसे बता दिया कि हम ठेका रद्द कर रहे हैं और हम अपनी तरफ से इस काम के लिए धन देंगे।