इस दो दिवसीय बैठक में शीर्ष सैन्य अधिकारी अन्य विषयों के अलावा सुरक्षा के मसले पर भी चर्चा करेंगे। लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control ) पर ज्यादा सैनिकों की तैनाती करने के लिए यह बैठक अहम मानी जा रही है।
नई दिल्ली। लद्दाख ( Ladakh ) में भारत ( India ) और चीन ( China )के बीच तनाव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। ऐसे में सीमा के पास चीन की बढ़ती दखलंदाजी को देखते हुए सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे ( Army Chief General Manoj Mukund Naravane ) अपने शीर्ष कमांडरों के साथ आज एक बैठक करेंगे।
लद्दाख सीमा पर चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारत ने भी सख्त रवैया अपनाया हुआ है। भारत ये पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह चीन सीमा ( China Border ) पर निर्माण कार्य को किसी हाल में नहीं रोकेगा। इसके अलावा सीमा पर चीन के बराबर सैनिक भी तैनात किए जाएंगे।
सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो दिवसीय बैठक में शीर्ष सैन्य अधिकारी अन्य विषयों के अलावा सुरक्षा के मसले पर भी चर्चा करेंगे। लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control ) पर ज्यादा सैनिकों की तैनाती करने के लिए यह बैठक अहम मानी जा रही है।
इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ( Defense Minister Rajnath Singh ) ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेना के प्रमुखों के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि चीन के आक्रामक रुख के कारण किसी निर्माण परियोजना को रोकने की जरूरत नहीं है।
एक घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ( Manoj Mukund Naravane ) ने अपने लेह दौरे की जानकारी दी। सेना प्रमुख शुक्रवार को ही स्थिति का जायजा लेने लद्दाख स्थित सेना की 14वीं कोर के मुख्यालय गए थे।
भारत इस मसले को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखेगा लेकिन सैनिकों की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी। चीन के साथ लद्दाख में करीब 20 दिन से जारी विवाद की वजह से भारत ने चीन से सटी पर उत्तरी सिक्किम ( Sikkim ), उत्तराखंड ( Uttarakhand ) और अरुणाचल प्रदेश ( Arunachal Pradesh ) सीमा पर भी सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है।
गलवां घाटी ( Galwan Valley ) और पेंगोंग त्सो ( Pangong Tso ) के आसपास चीन ने अस्थाई निर्माण के साथ अपने सैनिकों की संख्या पांच हजार तक बढ़ा दी है। इस इलाके में चीन ने अपने 100 से ज्यादा टेंट लगाए हैं और बंकर निर्माण के लिए भारी मशीनों की तैनाती की हैं। जिस वजह से भारत भी लगातार सैनिकों तैनाती और गश्त बढ़ा रहा है।
एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया, अभी इस तनाव को खत्म करने में किसी तरह की कोई कामयाबी नहीं मिली। हालांकि उन्होंने जल्द ही इस मसले के सुलझने की उम्मीद जताई है। शीर्ष सैन्य कमांडरों की बुधवार से शुरू हो रही कॉन्फ्रेंस में चीन से जारी विवाद पर गहराई के साथ मंथन होगा।
सैन्य प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया, शीर्ष सैन्य नेतृत्व सुरक्षा और प्रशासन से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों और भविष्य में उनसे निपटने पर विचार करेगा। आपको बता दें कि पैंगोग त्सेे झील के पास झड़प के दौरान चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों पर डंडों, कंटीले तारों और पत्थरों से हमला किया, जिसका भारत ने भी उचित जवाब दिया था।