Ayodhya verdict: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था बड़ा फैसला विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देने का फैसला सुन्नी वफ्त बोर्ड को अलग से 5 एकड़ जमीन देने की कही बात
नई दिल्ली। देश के 70 साल पूराने केस अयोध्या राम मंदिर जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला ( Ayodhya Verdict ) सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देने का फैसला ( Ayodhya Faisla ) किया है। बता दें कि इस मामले में 3 बड़े पक्षकार थे। पहला हिंदू पक्ष, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा राम लला विराजमान।
तीनों पक्षकारों के वकिलों ने अपने-अपने दावे पेश किए थे, जिस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। तो आइए जानते हैं कि हिंदू पक्षकारों ने कोर्ट के सामने क्या दलीले रखी थी-
हिंदू पक्षकारों की दलील
हिंदू पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी दलील रखते हुए कहा था कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ। राम देश के सांस्कृतिक पुषष हैं।
हिंदू पक्षकारों ने कहा कि राम का जन्म उस जगह पर हुआ था जहां मस्जिद का मुख्य गुंबद है। भगवान राम विष्णु हरि के 7वें अवातार हैं। उनकी प्राचिन मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।
हिंदू पक्षकारों के मुताबिक मंदिर में पूजा और त्योहार पौराणिक काल से चलते आ रहे हैं। इस बात की पुष्टि फाहयान और वहां आए विदेशी सैलानियों की डायरी और आलेखों से होती है।
इसके अलावा पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी रामजन्मस्थान की सटीक जानकारी दी गयी है। इसके अलावा इस बात के भी पुख्ता प्रमाण हैं कि 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर जबरन मस्जिद बनाई थी।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई की रिपोर्ट के मुताबिक विवादित ढांचे के नीच से टीले में भगवान राम के विशाल मंदिर के प्रमाण मिले हैं। वहीं, खुदाई में मिले पत्थरों में देवी देवताओं और हिंदू धार्मिक प्रतीको की नक्काशी की गई है। ये सब भी वहां मंदिर होने का प्रमाण देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
अयोध्या राम मंदिर जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसल सुनाते हुए विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देने का फैसला ( Ayodhya Faisla ) किया है। सुन्नी वफ्त बोर्ड को अयोध्या में अलग से 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है।
चीफ जस्टिस ने बाबरी मस्जिद (babri masjid) मामले पर शिया वक्फ बोर्ड (shia Central waqf board) के दावे को भी खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए मंदिर निर्माण के लिए अलग से बनेगा ट्रस्ट बनाने की बात कही है।