नीतीश कुमार की सरकार ने बुधवार को कुल 39 एजेंडों पर मुहर लगाई है। शराबबंदी के अलावा इनमें ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई के लिए ग्रिड बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी देना भी शामिल है।
पटना। बिहार में शराबबंदी पर नीतीश सरकार ने एक अहम संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के मुताबिक शराब बरामद होने पर घर, वाहन और खेत जब्त करने को लेकर कानून में नरमी बरती गई है। नीतीश कुमार की सरकार ने बुधवार को कुल 39 एजेंडों पर मुहर लगाई है। शराबबंदी के अलावा इनमें ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई के लिए ग्रिड बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी देना भी शामिल है।
कैबिनेट से मंजूरी के बाद अब ऐसा होगा कानून
- पहली बार शराब पीते हुए पकड़े जाने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना या तीन महीने की सजा का प्रावधान है।
- सामूहिक जुर्माने का प्रावधान खत्म करने को भी मंजूरी मिली है।
- शराब में हानिकारक पदार्थ मिलाने और इससे मृत्यु होने पर सख्त कानून के प्रस्ताव की मंजूरी दी गई है। ऐसे मामलों में दोषी को उम्रकैद या फिर मौत की सजा हो सकती है।
- प्रतिबंध के बावजूद शराब पीने को लेकर तीन साल की सजा पूरा कर चुके लोग जेल से बाहर निकलेंगे।
- शराब बरामद होने पर घर, वाहन और खेत जब्त करने को लेकर कानून में नरमी बरती गई है।
सवा लाख गिरफ्तारियों का है दावा
गौरतलब है कि शराब पर प्रतिबंध नीतीश कुमार के सबसे बड़े फैसलों में शुमार माना जाता है। पिछले दो साल से बिहार में पूर्ण शराबबंदी है। 'मद्यनिषेध और उत्पाद विधेयक-2016' में कड़े सजा के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत तहत पांच साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और नशे में पकड़े जाने पर न्यूनतम एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक आर्थिक दंड का प्रावधान रखा गया था। सरकार के दावों के मुताबिक, शराबंदी का उल्लंघन करने के आरोप में सवा लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है।